अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब 19 हजार सीटों पर आरक्षण घोटाला हुआ है, जिससे हजारों योग्य उम्मीदवार नौकरी से वंचित रह गए हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 69000 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। बुधवार सुबह बड़ी संख्या में आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर लखनऊ में विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी हाथों में झाड़ू और मटका लेकर पहुंचे, जो उनके भविष्य के प्रति अनिश्चितता और निराशा का प्रतीक थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार ने उन्हें उनका हक नहीं दिया, तो वे सड़कों पर झाड़ू लगाने और मटका लेकर घूमने को मजबूर हो जाएंगे। विधानसभा घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया।
प्रदर्शन कर रहे उम्मीदवारों का मुख्य आरोप है कि इस पूरी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण नियमों की अनदेखी की गई है। उनके अनुसार, ओबीसी वर्ग को निर्धारित 27 प्रतिशत के स्थान पर मात्र 3.86 प्रतिशत और अनुसूचित जाति (एससी) को 21 प्रतिशत की जगह केवल 16.2 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। अभ्यर्थियों का दावा है कि करीब 19 हजार सीटों पर आरक्षण घोटाला हुआ है, जिससे हजारों योग्य उम्मीदवार नौकरी से वंचित रह गए हैं। उनका कहना है कि बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 और आरक्षण नियमावली 1994 का उल्लंघन कर चयन सूची तैयार की गई है, जो सीधे तौर पर उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
मामला वर्तमान में कानूनी दांव-पेंच में भी फंसा हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले 18 महीनों से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की प्रभावी पैरवी नहीं की जा रही है, जिसके कारण न्याय मिलने में लगातार देरी हो रही है। गौरतलब है कि 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पुरानी चयन सूची को रद्द करते हुए तीन महीने के भीतर नई सूची जारी करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि वर्ष 2020 से लंबित मामलों में याची लाभ देते हुए भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी नहीं की गई, तो उनका आंदोलन और अधिक उग्र होगा।





