वॉशिंगटन। भारत ने बंधुआ मजदूरी से जुड़े सामानों पर शुल्क लगाने के अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुनवाई में अमेरिकी रुख में असंगतियों की ओर ध्यान दिलाया है। वाणिज्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने बुधवार को यूएसटीआर की समिति के समक्ष कहा कि अमेरिका।,600 ऐसे सामानों को बंधुआ मजदूरी संबंधी जांच से छूट देता है, जिनका उत्पादन या खेती उसके देश में नहीं हो सकती।
यूएसटीआर समिति के सवालों के जवाब में मिश्रा ने कहा,हमारा कहना है कि यूएसटीआर द्वारा दी गई छूट न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बंधुआ मजदूरी के प्रभाव से निपटने के नीति संबंधी उद्देश्य को कमजोर करती है, बल्कि नियमों से बचने की प्रवृत्ति से पैदा होने वाले ऐसे प्रभाव को रोकने के उद्देश्य को भी कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कपास और उससे जुड़े उत्पादों का उपयोग करके निर्मित कपड़ा उत्पादों के निर्यात पर अमेरिका रियायती शुल्क दरें लागू करता है। मिश्रा ने कहा,अमेरिका के वस्त्र संबंधी कच्चे माल के आयात पर कम शुल्क दरें हैं। वस्त्र क्षेत्र से जुड़ी यह व्यवस्था एक मनमानी शर्त की तरह काम करती है। यह विदेशी विनिर्माताओं के स्रोत निर्धारण संबंधी निर्णयों को प्रभावित और सीमित करती है, जबकि इससे बंधुआ मजदूरी की चिंता का पूर्ण समाधान नहीं होता।
साथ ही उन्होंने कहा कि भारत बातचीत के लिए तैयार है और सभी चिंताओं का समाधान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के ढांचे में किया जाना चाहिए, न कि धारा 301 की जांच के तहत अपनाए जा रहे किसी विशेष एकतरफा तरीके से। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ने 11 और 12 मार्च 2026 को बंधुआ मजदूरी और जरूरत से अधिक औद्योगिक क्षमता से जुड़ी चिंताओं को लेकर 60 देशों के खिलाफ धारा-301 के तहत दो अलग-अलग जांच शुरू की है। यूएसटीआर ने तीन जून को बंधुआ मजदूरी से जुड़ी जांच रिपोर्ट जारी की और 54 देशों से होने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव में कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया,मेक्सिको और पाकिस्तान से होने वाले आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क और भारत तथा चीन समेत 48 अन्य अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाने की बात शामिल है।
उद्योग निकाय फेडरेशन आॅफ इंडियन चैम्बर्स आॅफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई)के प्रतिनिधियों ने भी यूएसटीआर समिति के समक्ष अपने विचार रखे। अमेरिका में फिक्की की प्रतिनिधि पूर्णिमा शेनॉय ने कहा,अतिरिक्त शुल्क से केवल भारतीय निर्यातकों की नहीं बल्कि अमेरिकी विनिर्माताओं, आयातकों, खुदरा विक्रेताओं और अंतत: अमेरिकी उपभोक्ताओं की लागत भी बढ़ेगी।शेनॉय ने कहा, स्थापित आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अधिक शुल्क उन कारोबारों की लागत बढ़ाएगा, जो पहले से ही अनुपालन मानकों का पालन कर रहे हैं। इससे बंधुआ मजदूरी से बने सामानों की पहचान करने में कोई मदद नहीं मिलेगी। इससे केवल विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाएं महंगी हो जाएंगी।
प्रस्तावित शुल्क के जवाब में सीआईआई की प्रतिनिधि सुचिता सोनालिका ने कहा कि भारत की नीतिगत व्यवस्था 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा-301(बी) के तहत अनुचित या भेदभावपूर्ण नहीं मानी जा सकती। सोनालिका ने कहा कि भारत में एक मजबूत संवैधानिक तथा वैधानिक ढांचा मौजूद है, जो यह सुनिश्चित करता है कि भारतीय कंपनियां बंधुआ मजदूरी का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।
भारत ने साथ ही कहा कि यूएसटीआर यह साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े आयात पर प्रतिबंध का अभाव बाजार को विकृत करता है या अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचाता है। भारत का कहना है कि यूएसटीआर ने जांच के दायरे में शामिल 60 देशों का अलग-अलग विश्लेषण करने के बजाय व्यापक निष्कर्ष निकाला और भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों के संबंध में भी बंधुआ मजदूरी से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया।





