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कैबिनेट बैठक में 22 अहम प्रस्तावों पर मुहर, युवाओं और किसानों के लिए बड़े ऐलान, देखें पूरी लिस्ट

बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर, संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का होगा व्यापक सौंदर्यीकरण 14 अप्रैल को प्रदेश के सभी विधानसभा क्षेत्रों में होंगे विशेष कार्यक्रम

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति-2022 के अंतर्गत उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति (एचएलईसी) की संस्तुतियों को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय के तहत राज्य में संचालित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों को लेटर आॅफ कंफर्ट जारी करने, पूंजीगत सब्सिडी उपलब्ध कराने तथा परियोजनाओं में आवश्यक संशोधन को स्वीकृति दी गई है, जिससे उद्योगों को संचालन में सहूलियत मिलेगी और उनकी वित्तीय व्यवहार्यता मजबूत होगी। कैबिनेट में कुल 22 प्रस्तावों को हरी झंडी दिखाई गई।

अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने बताया कि कैबिनेट के समक्ष रखे गए प्रस्तावों में 6 नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, एक इकाई के सब्सिडी क्लेम और एक परियोजना में संशोधित एलओसी को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि शाहजहांपुर में ओएफसी टेक प्रा लि (589 करोड़ रुपये) एवं हाथरस में एजेआई केन इंडस्ट्रीज (1128 करोड़ रुपये) को एसजीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए एलओसी जारी किए जाने की मंजूरी दी गई है।

वहीं गोरखपुर स्थित इंडिया ग्लाइकोल्स लि.(669 करोड़ रुपये) और प्रयागराज की विस्कोस इंटरनेशनल प्रा. लि. (269 करोड़ रुपये) तथा गौतमबुद्ध नगर की इंटीग्रेटेड बैटरीज इंडिया प्रा. लि. (1146 करोड़ रुपये) को पूंजीगत सब्सिडी प्रदान करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इन इकाइयों की लागत में कमी आएगी और उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त मुरादाबाद में त्रिवेणी इंजीनियरिंग को पूंजीगत सब्सिडी वितरण की स्वीकृति दी गई है। साथ ही गौतमबुद्ध नगर स्थित आवादा इलेक्ट्रो लि. के 16,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में संशोधन प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने अनुमोदित कर दिया है, जिससे परियोजना के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं को दूर किया जा सकेगा।


ग्रीन एनर्जी पर फोकस
बैठक में विशेष रूप से सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े बड़े निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को ग्रीन एनर्जी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। इन परियोजनाओं से सोलर उपकरणों के आयात पर निर्भरता घटेगी और प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

25 लाख युवाओं को मिलेंगे टैबलेट, खरीद के लिए 2000 करोड़ का प्रावधान
कैबिनेट बैठक में स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को नि:शुल्क टैबलेट वितरण के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। कैबिनेट ने 25 लाख टैबलेट खरीदने के लिए जारी किए जाने वाले अंतिम बिड डॉक्यूमेंट को मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2000 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है और इसका पूरा व्यय राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के तहत प्रदेश के स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, कौशल विकास प्रशिक्षण, आईटीआई तथा सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत युवाओं को मुफ्त टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य युवाओं को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है, ताकि वे अपने शैक्षिक पाठ्यक्रमों को बेहतर ढंग से पूरा कर सकें और आगे चलकर रोजगार, स्वरोजगार तथा विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी अवसरों में इसका उपयोग कर सकें। पांच वर्षों तक लागू रहने वाली यह योजना प्रदेश में डिजिटल सशक्तीकरण और रोजगार सृजन की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है।

विस्थापित परिवारों को मिलेगा भूमिधर अधिकार
योगी सरकार ने कैबिनेट बैठक में एक अहम निर्णय लेते हुए जनपद पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए हजारों परिवारों को भूमिधर अधिकार प्रदान करने की मंजूरी दी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि इस फैसले से अपनी जमीन पर अतिक्रमणकारी कहे जाने वाले विस्थापित परिवारों को भूमिधर होने का सम्मान मिल सकेगा। राजस्व संहिता में यह संशोधन कर प्रदेश सरकार ने अंत्योदय के संकल्प को सिद्ध किया है। इस निर्णय से मुख्य रूप से भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय विस्थापित होकर आए और पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर व बिजनौर में बसाए गए शरणार्थी परिवारों को लाभ मिलेगा।

इसके लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश, 2026 के माध्यम से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 में संशोधन किया गया है, जिसके तहत पात्र परिवारों को असंक्रमणीय अधिकार दिए जाएंगे। दशकों से स्वामित्व के अभाव में ये परिवार खेती के लिए बैंक ऋण लेने और सरकारी खरीद केंद्रों पर उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे। अब इस निर्णय से उन्हें अपनी जमीन का कानूनी मालिकाना हक मिलेगा, जिससे वे आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे और सम्मानजनक तरीके से अपनी फसल बेच पाएंगे। यह कदम न केवल इन परिवारों को कानूनी सुरक्षा देगा, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तीकरण और सामाजिक सम्मान को भी सुनिश्चित करेगा। सुरेश खन्ना ने बताया कि लखीमपुर में शरणार्थी परिवारों की संख्या 2350, पीलीभीत में 4000, बिजनौर के 18 ग्रामों में 3856 और रामपुर के 16 ग्रामों में 2174 है।

कानपुर देहात में बसाए जाएंगे 99 हिन्दू बंगाली परिवार
पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) से विस्थापित हिन्दू बंगाली परिवारों के पुनर्वास से जुड़े प्रस्ताव को भी योगी कैबिनेट ने कार्योत्तर अनुमोदन दे दिया। इसके तहत जनपद मेरठ के मवाना तहसील क्षेत्र से संबंधित 99 परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील के ग्राम भैंसाया और ताजपुर तरसौली में पुनर्वासित किया जाएगा। साथ ही इनके लिए लीज रेंट 1 रुपये निर्धारित करते हुए पट्टे के प्रारूप को भी स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय पूर्व में 2021 में 63 विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के लिए निर्धारित प्रावधानों के आधार पर लिया गया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निदेर्शों और प्रकरण की तात्कालिकता को देखते हुए पहले ही प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही की जा चुकी थी, जिस पर अब कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इससे प्रभावित परिवारों को वैध आवासीय अधिकार मिलने के साथ उनके पुनर्वास की प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सकेगी।

गोरखपुर में बनेगा वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय
कैबिनेट बैठक में गोरखपुर में उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी गई। इसके लिए ह्लउत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026 के प्रख्यापन को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह विश्वविद्यालय गोरखपुर के कैम्पियरगंज क्षेत्र में लगभग 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री, फल एवं बागवानी सहित कई आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना, किसानों और छात्रों को आधुनिक प्रशिक्षण देना तथा कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना है। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

एयरपोर्ट जैसे बनेंगे यूपी के 49 बस स्टेशन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशनों के विकास के द्वितीय चरण को मंजूरी दे दी गई है। इस चरण में प्रारंभिक रूप से प्रस्तावित 54 बस स्टेशनों में से 6 अनुपयुक्त स्टेशनों को हटाते हुए तथा जनपद चंदौली को शामिल करते हुए कुल 49 बस स्टेशनों को विकसित किया जाएगा।

यह परियोजना पीपीपी के डीबीएफओटी (डिजाइन, बिल्ट, फाइनेंस, आॅपरेट एंड ट्रांसफर) मॉडल पर लागू की जाएगी, जिसमें राज्य सरकार पर कोई वित्तीय बोझ नहीं आएगा। प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि परियोजना के तहत बस स्टेशनों को अत्याधुनिक स्वरूप दिया जाएगा, जहां यात्रियों को शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर, बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छता एवं अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए पात्रता शर्तों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। तकनीकी क्षमता की शर्त को परियोजना लागत के 150% से घटाकर 100% किया गया है, वहीं परियोजनाओं को पूरा करने की समय सीमा 5 से बढ़ाकर 8 वर्ष कर दी गई है।

नेट वर्थ की अनिवार्यता परियोजना लागत का 25% निर्धारित की गई है तथा कंसोर्टियम में सदस्यों की अधिकतम संख्या 3 से बढ़ाकर 4 कर दी गई है। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने पर परियोजना का काम शुरू करने की समय सीमा भी 6 माह से बढ़ाकर 12 माह कर दी गई है। निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी स्थलों पर 2.5 फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) और ग्राउंड कवरेज की नि:शुल्क अनुमति देने का प्रस्ताव है। लीज अवधि 35 या 90 वर्ष निर्धारित की गई है और इसके समाप्त होने पर स्वामित्व स्वत: ही उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉपोर्रेशन को प्राप्त हो जाएगा।

कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि बिडिंग प्रक्रिया के दौरान यदि किसी संशोधन की आवश्यकता होती है, तो उसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया जाएगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि इस योजना के प्रथम चरण में 23 बस स्टेशनों (लखनऊ, कानपुर, आगरा सहित) को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है और द्वितीय चरण के 49 बस अड्डों के साथ अब कुल 52 जनपद इस योजना से आच्छादित हो जाएंगे, जबकि शेष 23 जनपदों को अगले चरण में शामिल किया जाएगा।

परियोजना में 4000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश आने का अनुमान है (पहले चरण में लगभग 2500 करोड़ रुपये), जिसके तहत बस अड्डों को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करते हुए वीआईपी लाउंज, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल और ठहरने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कुल क्षेत्रफल का लगभग 55% हिस्सा सार्वजनिक सुविधाओं और 45% व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उपयोग होगा। परिवहन मंत्री ने बताया कि कैबिनेट में मंजूर किए गए अन्य प्रस्तावों के तहत सिकंदराराऊ (हाथरस), नरौरा (बुलंदशहर) और तुलसीपुर (बलरामपुर) में नए बस अड्डों के निर्माण हेतु नि:शुल्क भूमि हस्तांतरण को मंजूरी दी गई है। परियोजना के तहत निर्माण कार्य दो वर्षों में पूरा करने तथा व्यावसायिक गतिविधियों को सात वर्षों में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।


सामाजिक न्याय के प्रणेताओं के स्मारकों का सरकार करेगी संरक्षण
उत्तर प्रदेश में महापुरुषों की विरासत को सहेजने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए योगी सरकार ने हर विधानसभा क्षेत्र में 10 स्मारकों के विकास का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में डॉ. बी०आर० आंबेडकर मूर्ति विकास योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके तहत महापुरुषों, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों की मूर्तियों का संरक्षण, सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।


इसके अंतर्गत योगी सरकार बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के साथ-साथ संत रविदास, कबीर, ज्योतिबा फुले, महर्षि वाल्मीकि समेत अन्य महापुरुषों की मूर्तियों का व्यापक सौंदर्यीकरण करेगी। इसके साथ ही आगामी 14 अप्रैल को प्रदेश की सभी विधानसभा क्षेत्रों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहां स्थानीय जनप्रतिनिधि (सांसद, विधायक, एमएलसी) जनता को इस योजना और चयनित स्थलों के बारे में जानकारी भी देंगे।

यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित करेगी, बल्कि उन्हें जनोपयोगी केंद्र के रूप में भी विकसित करेगी। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने बताया कि योजना के तहत प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में 10-10 स्मारकों का विकास किया जाएगा। प्रति स्मारक 10 लाख रुपये की लागत तय की गई है। इसके अंतर्गत कुल 403 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन स्मारकों के आसपास बाउंड्रीवॉल, छत्र निर्माण, सौंदर्यीकरण, हरियाली का विकास और प्रकाश व्यवस्था की जाएगी। योजना का उद्देश्य सिर्फ मूर्तियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके आसपास के क्षेत्रों को विकसित कर स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित करना है।

निर्माण कार्यों के जरिए ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। योगी सरकार की यह पहल मूर्ति स्थलों को केवल प्रतीकात्मक स्थान न बनाकर उन्हें जानकारीपरक और जन उपयोगी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे नई पीढ़ी को महापुरुषों के योगदान के बारे में जानने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। इसके अंतर्गत 31 दिसम्बर, 2026 तक स्थापित मूर्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर उनके आसपास के क्षेत्र का सर्वांगीण विकास किया जाएगा।

ग्रेटर नोएडा में स्थापित होगा मेट्रो विश्वविद्यालय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। इस क्रम में ग्रेटर नोएडा में निजी क्षेत्र के अंतर्गत मेट्रो विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दी गई है, जो प्रदेश में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि उक्त अधिनियम के तहत निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, उनके विनियमन एवं संचालन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

उन्होंने बताया कि प्रायोजक संस्था सनहिल हेल्थकेयर प्रा. लि., नोएडा की ओर से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से आवंटित 26.1 एकड़ भूमि पर मेट्रो विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिसे विधिक प्रावधानों के अनुरूप परीक्षण के उपरांत स्वीकृति दी गई है। उच्च शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे तथा युवाओं को आधुनिक एवं रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराई जा सकेगी। यह पहल राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मिली मंजूरी
लखनऊ। प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं को सरकार की तरफ से बड़ी सौगात देते हुए स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत युवाओं को नि:शुल्क वितरण के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई। जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर टैबलेट वितरित किया जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इस योजना में 2000 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

योजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी, इससे केंद्र सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता नन्दी ने बताया कि योजना के तहत स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, आइटीआइ और कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़े छात्रों एवं प्रशिक्षुओं को टैबलेट नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे युवा न केवल अपनी पढ़ाई को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा कर सकेंगे, बल्कि आगे चलकर रोजगार, स्वरोजगार और विभिन्न सरकारी व गैर-सरकारी योजनाओं में भी इसका लाभ उठा सकेंगे।

इस पहल से प्रदेश के युवाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें डिजिटल युग के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा। साथ ही सेवामित्र पोर्टल पर पंजीकृत कुशल युवाओं को भी इससे सीधा लाभ मिलेगा। इस योजना का पूरा वित्तीय भार राज्य सरकार वहन करेगी। वर्ष 2021-22 से शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक 60 लाख युवाओं को टैबलेट व स्मार्ट फोन वितरित किए जा चुके हैं। गत वर्षों में हुई खरीद को देखते हुए इस वर्ष भी एक टैबलेट की कीमत 12 हजार रुपये आंकी जा रही है। ऐसे में 25 लाख टैबलेट की खरीद में तीन हजार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।

कुशीनगर में नारायणी नदी पर पुल निर्माण को मंजूरी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में कुशीनगर के खड्डा विधानसभा क्षेत्र के निवासियों के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है। सरकार ने नारायणी नदी के भैंसहा घाट पर एक नए बड़े पुल के निर्माण के प्रस्ताव को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति दे दी है। इसका निर्माण ईपीसी मोड में होगा, जिसकी कुल प्रस्तावित लागत 705 करोड़ रुपये है।

वर्तमान में इस घाट पर नदी पार करने का एकमात्र साधन पीपे का पुल (पॉन्टून पुल) है, जिसे मानसून के दौरान हटा दिया जाता है। नए पक्के पुल के बनने से बिहार और महराजगंज की यात्रा बारहमासी और सुगम हो जाएगी। इस पुल के निर्माण से बिहार और महराजगंज जाने के लिए यात्रियों को लगभग 40-50 किलोमीटर की कम दूरी तय करनी होगी। परियोजना से कुशीनगर और महराजगंज जिले के दर्जनों गांवों को सीधा लाभ मिलेगा।

छिबरामऊ में गंगा पुल को मंजूरी, 289 करोड़ होंगे खर्च
कन्नौज के विधानसभा क्षेत्र छिबरामऊ के विकास खंड गुरसहायगंज में ग्राम चियांसार व च्यवन ऋषि आश्रम के पास गंगा नदी पर पुल के निर्माण को मंजूरी दे दी गई है। इस पुल के निर्माण से कन्नौज और हरदोई के करीब 4 लाख नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। परियोजना के पूरे होने पर कन्नौज साइड से रतनगंगा नदी सेतु, पतिया बैरियर और रामगंगा नदी सेतु के माध्यम से हरदोई, बरेली एवं शाहजहांपुर जिलों से संपर्क सुगम होगा।

वहीं, हरदोई साइड के निवासी छिबरामऊ, गुरसहायगंज, कन्नौज, कानपुर और फरुर्खाबाद से राष्ट्रीय राजमार्ग-34 व आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के माध्यम से जुड़ सकेंगे। इससे समय एवं ईंधन की बचत होगी। यह परियोजना इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) मोड पर लागू की जाएगी। परियोजना की अनुमानित लागत 289 करोड़ रुपये है, जिसे वित्त समिति द्वारा अनुमोदित किया जा चुका है।

कोटेदारों से खाली बोरे खरीदने की मिली अनुमति
कैबिनेट ने गेहूं खरीद के लिए उचित दर विक्रेताओं के पास उपलब्ध पीडीएस से खाली बोरों को सीधे खरीदने की अनुमति खाद्य विभाग को दे दी है। अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के चलते बोरों की आपूर्ति बाधित हुई है। साथ ही बाजार भाव भी बढ़ गए हैं। इसलिए ई टेंडर और जेम से ही खरीद की शर्त में छूट देते हुए उचित दर विक्रेताओं के पास उपलब्ध पीडीएस से खाली यूज्ड बोरों की खरीद का फैसला किया गया है। इससे उचित दर विक्रेताओं से सीधे 20-25 हजार गांठ जूट बोरे तत्काल उपलब्ध हो सकेंगे और गेहूं खरीद का काम प्रभावित नहीं होगा।

बलिया में खुलेगा मेडिकल कॉलेज, निशुल्क मिलेगी कारागार विभाग की जमीन
बलिया में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय खुलेगा। इसके लिए जिला कारागार विभाग की 14.05 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को दी जाएगी। महाविद्यालय निर्माण में 437.0021करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। प्रदेश सरकार की ओर से हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज खोला जा रहा है।

इसी के तहत बलिया में भी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय खोलने की योजना तैयार की गई। सभी विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के बाद तय किया गया है कि जिला कारागार की 14.05 एकड़ जमीन चिकित्सा शिक्षा विभाग को निशुल्क उपलब्ध क राई जाएगी। कारागार के भवन का ध्वस्तीकरण और मलबा हटाने का कार्य चिकित्सा शिक्षा विभाग करेगा। भवन के निर्माण कर 437.0021 करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा। प्रदेश सरकार ने बजट वर्ष 2026-27 में 25 करोड़ का प्रावधान किया है।

तदर्थ कर्मचारी को विनियमित किए जायेंगे
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 की धारा-47(1) के अंतर्गत कर अधिकारी के पद पर की गई तदर्थ नियुक्ति को विनियमित किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसी के मद्देनजर संबंधित प्रस्ताव लाया गया था।


अध्यादेश के जरिये आसान की जाएगी भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। इस अध्यादेश के जारी होने पर विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, विनियमित क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में गैर-कृषि उपयोग (लैंड यूज) परिवर्तन की प्रक्रिया बेहद सरल हो जाएगी। अब इन क्षेत्रों में अलग से लैंड यूज बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी। 23 मार्च 2026 को हुई कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन की मंजूरी दे दी गई थी। इसके तहत अगर किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है, तो संबंधित भूमि का भू-उपयोग वही हो जाएगा, जिस उपयोग के लिए नक्शा पास किया गया है।

इससे पहले लोगों को दोहरी प्रक्रिया यानी पहले लैंड यूज परिवर्तन और फिर नक्शा पास कराने से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी। राज्य सरकार ने यह कदम उद्योग लगाने या फिर कारोबार करने वालों को राहत देने के लिए उठाया है।विधानसभा सत्र हाल-फिलहाल में आहूत होने वाला नहीं है, इसलिए अध्यादेश के माध्यम से इन बदलावों को लागू करने के लिए प्रस्ताव लाया गया था, जिसे मंजूरी दे दी गई है।

यातायात नियमों का उल्लंघन करना पडेगा भारी
यातायात नियमों का उल्लंघन करने समेत कई तरह के गैर शमनीय अपराध करने के बाद बच नहीं पाएंगे। कैबिनेट ने इस बाबत सुप्रीम कोर्ट में लंबित रिट याचिका पर दिए गए आदेश का पालन करने के लिए उप्र आपराधिक विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश लाने के गृह विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अध्यादेश में संशोधन किया जाएगा। इसके तहत गैर शमनीय अपराध पूर्व की तरह उपशमित (समाप्त) नहीं होंगे।

अध्यादेश में संशोधन के बाद जिन अपराधों में अनिवार्य कारावास का दंड है, वे अपराध जो प्रथम अपराध नहीं हैं, अर्थात वे बाद के अपराध है, वे पूर्व की भांति स्वत: समाप्त नहीं होंगे। उदाहरण के लिए यदि वर्तमान में किसी व्यक्ति की ओर से मोटर वाहन अधिनियम के तहत अपराध किया गया है और वह जुर्माना नहीं देता है तो एक समय बीतने के बाद कार्यवाही स्वत: समाप्त हो जाती है। अब उसे भी दंड का सामना करना होगा।

बता दें कि उप्र आपराधिक विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) अध्यादेश, 2023 मजिस्ट्रेट के सामने लंबित छोटे आपराधिक मामलों को समाप्त करने का प्रावधान करता है। यह अदालती बोझ कम करने के लिए समझौता या शमन (कंपाउंडिंग) की अनुमति देता है। यह विभिन्न कानूनों जैसे मोटर वाहन एक्ट 1939, न्यूनतम वेतन एक्ट 1948, पुलिस एक्ट 1861, और दंड प्रक्रिया संहिता 1973 के तहत किए गए अपराधों पर लागू होता है। अध्यादेश में संशोधन के बाद अपराध करने वाला अब बच नहीं सकेगा और साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इससे नियमों का उल्लंघन करने वालों के भीतर कानून का भय उत्पन्न होगा, जिससे अपराधों में कमी आएगी।

विवादित उप्र मदरसा विधेयक, 2016 वापस लेगी सरकार
योगी सरकार मदरसों के शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान में देरी को लेकर अखिलेश सरकार के समय के विवादित विधेयक को वापस लेगी। उत्तर प्रदेश मदरसा (अध्यापकों एवं अन्य कर्मचारियों के वेतन का भुगतान) विधेयक, 2016 को वापस लेने के लिए अब इसे विधानमंडल के दोनों सदनों में विचार होगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

इस विधेयक में मदरसा शिक्षकों को वेतन देने में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों को आपराधिक दंड देने के प्रावधान थे। सपा सरकार ने मदरसा शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए ऐसा विधेयक बनाया था जो बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों की तर्ज पर था। इस विधेयक में कुछ ऐसे प्रावधान थे, जिसके तहत मदरसा शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन समय पर न मिलने पर संबंधित अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा तक दर्ज कराया जा सकता था। इसके कुछ और बिंदुओं से तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक संतुष्ट नहीं थे।

उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए यह विधेयक राष्ट्रपति के पास भेज दिया था। केंद्र के न्याय विभाग और गृह मंत्रालय ने इस विधेयक की कुछ धाराओं पर गंभीर आपत्तियां जताई थीं। यह भी कहा कि इसके कई प्रावधान पहले से मौजूद कानून की धाराओं की विरोधाभासी हैं। इन आपत्तियों के आधार पर केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को सलाह दी कि वह इस विधेयक को वापस लेकर आवश्यक संशोधनों के साथ नया विधेयक लाने पर विचार करे।

  • कैबिनेट के अन्य फैसले
  • ओएफबी टेक प्रा.लिम. 589 करोड़ के निवेश के साथ शाहजहांपुर में एग्रो केमिकल्स बनाएगी।
  • इंडिया ग्लाइकॉन्स लिमिटेड गोरखपुर (गीडा) में एथेनाल प्रोडक्शन के लिए क्षमता विस्तार करेगी,669 करोड़ का निवेश।
  • सोलर सेल व मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट निर्माण के लिए 3805 करोड़ का निवेश,बुंदेलखंड व यमुना अथॉरिटी परिसर में।
  • बिसलेरी इंटरनेशनल प्रा.लिमिटेड, प्रयागराज में स्थापित होगा, 269.31 करोड़ का निवेश।
  • ए.जी.आई. कैन मैन्युफैक्चरिंग के लिए हाथरस में यूपीसीडा क्षेत्र में 1128.72 करोड़ का निवेश करेगा।
  • इंटीग्रेटेड बैटरीज इंडिया प्रा.लिमिटेड का सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट 1146 करोड़ का निवेश, यमुना अथॉरिटी परिसर में।

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