दीक्षारम्भ : भाषण एवं सांगीतिक प्रस्तुति सम्पन्न
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित दीक्षारम्भ-2026 कार्यक्रम के अंतर्गत आज विश्वविद्यालय के कलामंडपम सभागार में प्रेरक भाषण का आयोजन अत्यंत उत्साहपूर्ण एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रख्यात करियर काउन्सलर रोमा बच्चानी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारम्भ विभागाध्यक्ष (गायन) प्रो. सृष्टि माथुर द्वारा रोमा बच्चानी को अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। अपने प्रेरक संबोधन में सुश्री बच्चानी ने गुरु एवं विद्यार्थी के संबंधों पर आधारित प्रेरणादायी कहानियों के माध्यम से विद्यार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने करियर की दिशा निर्धारित करने, लक्ष्य तय करने तथा उस दिशा में निरंतर प्रयासरत रहने के प्रभावी मंत्र बताए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक सफल कलाकार बनने के लिए नियमित रियाज, प्रभावी संवाद कौशल, अनुशासन, आत्मविश्वास तथा सतत सीखने की प्रवृत्ति अत्यंत आवश्यक है। उनके विचारों ने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति सजग एवं प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा प्रदान की। उनके रोचक वक्तव्य से विद्यार्थी मंत्र मुग्ध हो गए। तत्पश्चात विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा सांगीतिक प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें राहुल कुमार द्वारा रूपक ताल, आलोक कुमार मिश्र द्वारा तीनताल एवं सोहम मिश्र द्वारा झपताल में तबला वादन प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को अत्यंत प्रभावित किया।
इस अवसर पर विभागाध्यक्ष (नृत्य) ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेयी एवं विभागाध्यक्ष (तालवाद्य) डॉ. मनोज कुमार मिश्र सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, संगतकर्ता तथा बड़ी संख्या में नवप्रवेशित विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपने करियर से संबंधित जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
कुलसचिव एस. पी. सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे आयोजनों के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास वृद्धि एवं व्यावसायिक दक्षता को सुदृढ़ करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि दीक्षारम्भ कार्यक्रम उनके शैक्षणिक जीवन की एक सशक्त शुरूआत है, जो उन्हें अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने हेतु आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय में चल रही चार दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला के द्वितीय दिवस के अंतर्गत प्रख्यात गुरु जयंत कस्तुआर द्वारा विद्यार्थियों को नृत्य में अभिनय एवं उपज के विभिन्न आयामों का अभ्यास कराया गया, जिससे विद्यार्थियों को शास्त्रीय नृत्य की सूक्ष्मताओं को समझने का अवसर प्राप्त हुआ। यह संपूर्ण कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं उनके भविष्य निर्माण की दिशा में अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणास्पद सिद्ध हुआ।





