लखनऊ।राजधानी के कृष्णानगर थाना क्षेत्र में मंगलवार की देर रात 32 वर्षीय अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी की गला रेत कर हत्या कर दी गयी। घटना के बाद कोहराम मच गया। हालत यहां तक पहुंची कि नाराज वकील बुधवार को शव लेकर कोर्ट रूम तक पहुंच गये। वहां भी जमकर हंगामा हुआ। उच्चअधिकारियों के आश्वासन पर वकील शान्त हुए। प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ कि शव को अदालत कक्ष में रखकर प्रदर्शन हुआ। इस मामले में पांच लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गयी है। एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
स्नेह नगर निवासी शिशिर त्रिपाठी सिविल कोर्ट मे वकालत करते थे। शिशिर की मंगलवार देर रात करीब 12 बजे कृष्णा नगर के दामोदर नगर में आपसी विवाद के बाद साथियों ने लाठी-डन्डों और ईट-पत्थर से जमकर पीट दिया। घनी बस्ती के बीच सरेराह हुई इस मारपीट के दौरान शिशिर मदद के लिये लोगों से गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने उनकी मदद नहीं की। मारपीट के दौरान लहूलुहान होने के बाद ब्लैड से उसका गला रेत दिया।
गंभीर रूप से घायल शिशिर को सड़क के बीचों-बीच फेंक कर फरार हो गये। हत्यारों के भागने के बाद मौके पर आये स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुचीं पुलिस ने घायल शिशिर को गंभीर हालत में लोक बन्धु अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। अधिवक्ता की हत्या की खबर मिलते ही लोग उत्तेजित हो गये। साथी अधिवक्ताओं ने पोस्टमार्टम के बाद उनके शव को पहले डालीगंज पुल के पास रखकर प्रर्दशन किया।
उसके बाद वह शव को लेकर कोर्ट रूम में घुस गये। वहां शव को रखकर पचास लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी समेत सुरक्षा सम्बन्धी मांग की गयी। मौके पर पंहुचे आला-अधिकारियों के आश्वासन के बाद अधिवक्ताओं ने प्रर्दशन बंद कर दिया। परिजनों ने देर शाम शव का अन्तिम संस्कार कर दिया।





