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लॉकडाउन में बढ़ा लविवि का शोध कार्य, प्रकाशित 116 जर्नल

– लॉक डाउन में औसतन प्रतिदिन छह शोध पेपर तैयार कर रहे शिक्षक

– बीते पांच साल में करीब दो हजार शोध पेपर हुए तैयार

लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन से जहां एक ओर पढ़ाई की रफ्तार को धीमा कर रखा हैं, तो वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय के शोध कार्य में बड़ी तेजी देखने को मिल रही है। लॉकडाउन के दिनों में लखनऊ विश्वविद्यालय में हुए शोध कार्य ने विश्वविद्यालय में हुए अभी तक एक शोध कार्य के रफ्तार ने सभी अधिकारियों को चौका दिया है।

बीते 20 दिनों में विश्वविद्यालय में 116 से अधिक शोध पेपर विभिन्न विभागों की ओर से तैयार कर दिया गया। साथ ही विभिन्न किताबों के लिए 39 चैप्टर भी प्रोफेसर के द्वारा लिखे गए है जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि पिछले पांच वर्षों में 2000 शोध पेपर तैयार किया है, जिसका अर्थ है बीते पांच साल में औसतन एक शोध पेपर तैयार हो रहा था जबकि लॉकडाउन में औसतन छह रिसर्च पेपर एक दिन में तैयार हो रहा है।

लॉकडाउन में शोध पेपर तैयार करने के मामले में सबसे आगे लखनऊ विश्वविद्यालय का भौतिक विज्ञान विभाग है। जहां पर कुल 26 शोध पेपर विभाग के प्रोफेसरों ने बीते 20 दिनों में तैयार किया है। इसमें भी सबसे ज्यादा रिसर्च पेपर भौतिक विज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो. पूनम टंडन ने सबसे अधिक 12 रिसर्च पेपर इन दिनों में तैयार किया है। इसके साथ ही जुलॉजी विभाग ने 21 रिसर्च पेपर तैयार कर दूसरे नंबर है लेकिन जुलॉजी विभाग के प्रोफेसर ने विभिन्न किताबों के लिए अलग से आठ चैप्टर भी लिखे है।

जुलॉजी में प्रो. ओमकार और प्रो. गीताजंली में छह-छह रिसर्च पेपर इस दौरान पूरे किए है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि सभी रिसर्च दुनिया की अनुसंधान लेख की शीर्ष पत्रिकाओं जैसे स्प्रिंगेर, नेचर, रायल सोसाइटी आॅफ केमिस्ट्री, कैम्ब्रिज जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित भी हो गए है। इसके अलावा विभिन्न विभागों में अपने-अपने विषय पर करीब नौ पुस्तकों के लेखन और संपादन कार्य चल रहा है।

कला संकाय में सबसे कम शोध पेपर प्रकाशित

एक ओर जहां सभी विभाग लॉकडाउन में वर्क फॉर्म होने में विद्यार्थियों को आॅनलाइन क्लास पढ़ाने के साथ ही अपना रिसर्च वर्क पूरा करने में लगे हुआ है, तो वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय के कला संकाय के कुछ विभाग ऐसे भी है, जो इसमें भी खाली ही बैठे है। जहां से अभी तक कोई रिसर्च पेपर या किताबें तैयार करने की कोई जानकारी नहीं मिली है।

विश्वविद्यालय के क्वालिटी एंड एशोयोरेंस सेल के अध्यक्ष प्रो. राजीव मनोहर ने बताया कि लॉकडाउन में शिक्षकों के द्वारा किए गए यह रिसर्च के काम का लाभ विश्वविद्यालय को नैक मूल्यांकन में होगा क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर अभी तक लखनऊ विश्वविद्यालय में शोध के क्षेत्र में कभी ऐसा काम नहीं हुआ था। यहां तक शासन स्तर से भी लॉकडाउन में शिक्षकों के द्वारा किए गए कामों की जानकारी मांगी गई है। यह हमारे लिए काफी अच्छा है, हम शासन को भेजने के लिए विश्वविद्यालय के पास इतना डाटा मौजूद है।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने बताया कि किसी भी शैक्षिक संस्थान के लिए शोध कार्य काफी अच्छा माना जाता है। हमारे शिक्षकों ने बीते 20 दिनों में काफी अच्छा काम किया है। इसका फायदा हमे आगे होने वाले नैक मूल्यांकन में होगा।

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