संगीत की धुनों में जागृत हुई भारत की आत्मा
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री, उ.प्र. की कला संवर्धन-संरक्षण की नीति के अनुपालन में एवं जयवीर सिंह की प्रेरणा व मार्गदर्शन में तथा प्रो. जयंत खोत अध्यक्ष, विभा सिंह उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. शोभित कुमार नाहर के निर्देशन में पंडित रविशंकर म्यूजिक फाउण्डेशन के संयुक्त तत्वावधान में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा भारत रत्न पंडित रविशंकर की 107वीं जयंती के उपलक्ष्य में संगीत की धुनों में भारत की आत्मा, के माध्यम से पंडित रविशंकर को सुरीली श्रद्धांजलि अकादमी परिसर में स्थित संत गाडगेजी महाराज प्रेक्षागृह में अर्पित की गई। इसमें संगीत की त्रिवेणी-नृत्य, गायन और वादन का सुरीला और दर्शनीय संगम पेश किया गया। इस समारोह में कलाकारों का अभिनंदन भी किया गया। वैदिक गुरुकुल आश्रम के बच्चों ने इस अवसर पर शान्ति पाठ भी किया। इस अवसर पर अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत ने समारोह में आमंत्रित वरिष्ठ कलाकारों का स्वागत करते हुए बताया कि अकादमी एक ओर जहां संगीत के नवांकुरों को प्रोत्साहित कर रही है वहीं दूसरी ओर लुप्त होती कलाओं को संरक्षण भी प्रदान कर रही है।
समारोह की औपचारिक शुरूआत भारत गान की प्रभावी प्रस्तुति से की गई। इसमें तेजस्विनी इंगले, मुक्ता चटर्जी, राहुल अवस्थी, आशीष तिवारी के समूह गायन दल ने प्रतिभाग कर प्रशंसा हासिल की। इसमें लगभग 25 संगीत के छात्र-छात्राओं ने तिरंगा वेशभूषा में शुभ सुख चैन की बरखा बरसे, भारत भाग्य है जागा, भारत गान सुनाकर राष्ट्रभक्ति का सशक्त भाव जागृत किया। पंडित रवि शंकर म्यूजिक फाउण्डेशन के अध्यक्ष नबारुन चटजीर्का प्रयास है कि अयोध्या जी में 11 हजार गायकों के माध्यम से भारत गान का विश्व कीर्तिमान स्थापित किया जाए। इस क्रम में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की प्रादेशिक प्रतियोगिता में गोरखपुर संभाग के पुरस्कृत कलाकार एवं पंडित रविशंकर के पौत्र आर्यन चटर्जी ने सरोद का सुमधुर वादन किया।
समरीन के कुशल संचालन में हुए समारोह का केन्द्रीय आकर्षण रहा भारतीय संगीत वाद्यों की सुरमयी त्रिवेणी। इसमें उत्तर भारत के लोकप्रिय वाद्य संतूर के साथ मध्य भारत में लोक्रपिय बांसुरी और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले वाद्य वायलिन का सुमधुर वादन सुनने का सुनहरा अवसर मिला।
पंडित रविशंकर के शिष्य रहे पद्मश्री तरुण भट्टाचार्या ने संतूर वादन में नए प्रयोगों और वैश्विक मंचों पर प्रस्तुतियों के जरिए विशिष्ट पहचान बनाई है। कश्मीर का यह प्राचीन वाद्य शततंत्री वीणा भी कहा जाता है क्यों कि अखरोट की लकड़ी से बने इस वाद्य में 100 तार होते हैं जिन्हें दो छोटी-छोटी डंडियों जिसे मिजराब कहते हैं के माध्यम से स्वरित किया जाता है। पद्मश्री तरुण भट्टाचार्या के प्रभावी संतूर वादन के सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया था।
इस संगीत त्रिवेणी में संस्कार भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष एवं मैसूर के लोकप्रिय कलाकार पंडित मैसूर मंजूनाथ ने अत्यंत सुरीला वायलिन वादन किया। भारत के एक अत्यंत प्रतिष्ठित कर्नाटक शास्त्रीय वायलिन वादक पंडित मैसूर मंजूनाथ अपने बड़े भाई मैसूर नागराज के साथ मिलकर प्रसिद्ध मैसूर ब्रदर्स के रूप में विश्वभर में लोकप्रिय हैं। उनके कर्णप्रिय वादन से समारोह परवान चढ़ा। इसी संगीत त्रिवेणी में पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार ने सुमधुर बांसुरी वादन कर सबका दिल जीत लिया। प्रतिष्ठित ग्रैमी अवार्ड के लिए नामांकित एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित पद्मश्री पंडित रोनू मजूमदार ने आर.डी. बर्मन, किशोर कुमार, आशा भोसले और विशाल भारद्वाज जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है। फिल्म ‘परिंदा’ में उनके बांसुरी वादन को खासा सराहा गया है। उनके नाम सबसे बड़े बांसुरी कलाकारों के समूह का नेतृत्व करने का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड भी दर्ज है।
इस संगीत त्रिवेणी में ताल वाद्य तबले पर लोकप्रिय कलाकार पंडित देव नारायण मिश्रा ने बनारस अंग का तबला वादन कर प्रशंसा हासिल की। दूसरी ओर नवांकुर ज्योतिर्मय रॉय चौधरी के तबला वादन ने भी वाहवाही अर्जित की। इस अवसर पर बिरजू महाराज कथक संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी, आकाशवाणी लखनऊ की कार्यक्रम प्रमुखप्रभारी सुमोना पांडेय सहित कई वरिष्ठ संगीतकार और संगीत रसिक उपस्थित रहे।





