भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह में विविध सेवा संस्थान द्वारा सुप्रसिद्ध रंगकर्मी निर्देशक आतमजीत सिंह द्वारा लिखी व निर्देशित नौटंकी ये कैसा इंसाफ का मंचन किया गया। इसमें समाज की न्याय व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार एवं रिश्वत लेकर मनमाने फैसले सुनाने की चली आ रही प्रवृत्ति पर एक चुटिला प्रहार है। पूरी नौटंकी लोगों के आपसी झगड़ों पर रिश्वतखोर काजी की अदालत में हुए फैसलों पर आधारित है। पहला मुकदमा छैला और छबीला का है छैला अपने बड़े भाई छबीला से खेत जोतने के लिए बैल मांग कर ले जाता है जब वापस करता है तो बैल की पूंछ कटी होती है। काजी के समक्ष अपने बयान पर छैला बताता है कि बैल नथा न होने के कारण मजबूरन उसने बैल की पूंछ हल बांध दी और बैल की जुताई के दौरान झटका लगने से बैल की पूंछ कट गई । काजी जैसे ही फैसला सुनाने लगता है, छैला चुपके से अशर्फियों की थैली उसको पकड़ता है और फैसला अपने हक में करवा लेता है। दूसरा मुकदमा काजी के पास भोला नाम का व्यक्ति लेकर आता है और छैला पर इल्जाम लगाता है कि छैला ने पुल से छलांग लगाई और सीधा उसके पिता पर आ गिरा, जो नाव से वहां गुजर रहे थे। छैला फिर काजी को रिश्वत देकर फैसला अपने हक में करवाता है। तीसरा मुकदमा सराय की एक मालकिन चंदनबाई का है , उसके बच्चे को वहां ठहरा हुआ यात्री छैला पालने में झुलाता है। इस बार भी छैला फंस जाता है। अनोखी घटनाओं, चुटीले संवादों , हास्य व्यंग्य से भरपूर प्रस्तुति ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। काजी की सशक्त भूमिका में गगनदीप सिंह, जोकर की भूमिका में पंकज सत्यार्थी, छैला प्रियांक, छबीला अभिजीत, चंदनबाई श्रेया ,भोला आदित्य ने मुख्य भूमिका निभाई। जयनित्य, आंचल, अकील, अलंकार, शिवदीन, शिखा, अमर, वान्या, ने भी अपने अभिनय से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। वही सहायक निर्देशन सरबजीत सिंह का रहा। हारमोनियम पर इलियास खान, नक्कारे पर मोहम्मद सिद्दीक एवं ढोलक पर मुन्ना खान थे। वेशभूषा करमजीत कौर ,मुखसज्जा शाहिर, सचिन व प्रकाश व्यवस्था मनीष सैनी की थी।





