कवि सम्मेलन के साथ शुरू हुआ केजीएमयू का सालाना जलसा
वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। जीतने का भी हुनर आजमाना चाहिए, भाइयों से जंग हो तो हार जाना चाहिए। बुधवार को अटल बिहारी बाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेन्टर में जौहर कानपुरी ने जब यह पंक्ति सुनायी तो तालियों से पूरा आडिटोरियम गूंज उठा।
मौका था किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय का सालना जलसा यानि रैप्सोडी कार्यक्रम। बुधवार को उत्सव का आगाज कवि सम्मलेन के साथ हुआ। इस मौके पर कविओं ने अपनी कविताओं से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शबीना अदीब ने अपनी डाली से बिछड़े अलग हो गये, पेड़ के सारे पत्ते अलग हो गये। ईश्वर भी वही है, खुदा भी वही, जाने क्यूं उसके बंदे अलग हो गये, नज्म सुनाकर खूब तालियां बटोरी।
कन्वेंशन सेन्टर में शाम 5 बजे से शुरू हुई इस शाम-ए-नज्म कवि सम्मेलन में शबीना अदीब, डा. श्रेय गौतम, डा. प्रकाश खेतान, तुषा शर्मा, जौहर कानपुरी, विकास बौखल और पंकज प्रसून ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम के आयोजक सचिव डा. संदीप तिवारी ने बताया कि कवि सम्मेलन से केजीएमयू का सालाना जलसा शुरू हुआ है।
तीन दिवसीय इस जलसे में मेडिकल छात्र-छात्राएं नुक्कड़ नाटक का मंचन करेंगे। फनी गेम का आयोजन होगा। इसके साथ ही एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिंग 2020 बैच के छात्र-छात्राएं खेलकूद प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे। सोलो डांस, शोहरत का खेल होगा। इसके बाद द प्री क्लीनिक क्वीज, पोटरी राइटिंग समेत दूसरी प्रतियोगिताएं होंगी। रैप्सोडी में अंतिम दिन यानी 13 अक्तूबर को मिस एंड मिस्टर रैप्सोडी का चयन होगा। मालूम हो कि केजीएमयू में हर साल रंगारंग कार्यक्रम रैप्सोडी मनाया जाता है।





