15 दिवसीय उत्तरायणी मेले का तृतीय दिवस
लखनऊ। बीरबल साहनी मार्ग, पंडित गोविंद बल्लभ पंत सांस्कृतिक उपवन में भव्य स्टेज पर चल रहे विविध रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा दिन में चल रही प्रतियोगिताएं उत्तरायणी मेले में आए दर्शकों को अपनी ओर खींच लेती है तथा रंग बिरंगी पोशाक पहने छोलिया दल विविध करतब की प्रस्तुति लोक संस्कृति की झलक बीच बीच में प्रस्तुत कर दर्शकों का मंत्र मुग्ध करती है। पर्वतीय महापरिषद के (25 साल पूर्ण) रजत जयंती के शुभअवसर पर 15 दिवसीय उत्तरायणी कौथिग का तृतीय दिवस का आरम्भ एकल नृत्य एवं सामुहिक नृत्य प्रतियोगिताओं से हुआ जिसमें बसन्त भट्ट द्वारा पंजीकृत 3 से 8 वर्ष, 8 से 13 वर्ष एवं 14 से अधिक वर्ष के आयु वर्ग के 53 प्रतिभागियों ने अपनी नृृत्य कला से निर्णायक मण्डल व दर्षकों का मन मोहने का भरसक प्रयास किया। प्रतियोगिता के निर्णायक मण्डल में आकांक्षा आनन्द व मेनका सक्सेना रहीं एवं प्रतियोगिता का संचालन संरक्षक जे पी डिमरी एवं प्रभारी साहित्य प्रकोष्ठ ज्ञान पंत ने किया, प्रतियोगिता में 3 से 8 वर्ष आयुवर्ग में क्रमष: कृषिका भाकुनी, सान्वी बिष्ट, भाव्या, पतिष्ना पाण्डे प्रथम द्वितीय तृतीय व सांत्वना, 9 से 13 आयुवर्ग में तनिष्का आर्या, आदित्य पाण्डे, लतिका बिष्ट, यषिका नेगी प्रथम, द्वितीय, तृतीय व सांत्वना, तेरह वर्ष से अधिक में वन्दना सिंह, षितल धामी, मंषिका कनौजिया व गरिमा मेहरा और सामुहिक नृत्य में जोहार सांस्कृतिक संस्था, मोनिका मेहरा ग्रुप, पल्लवी दल व किरन चैबे प्रथम, द्वितीय तृतीय एवं सांत्वना पुरूष्कार के भागी बने।
तत्पश्चात् विकास नगर के क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा पारम्परिक परिधान में गीत संगीत एवं नाट्य कला की प्रस्तुतियों से मंच सुशोभित रहा। इसी क्रम में आज कौथिग मंच से म्युजिकल उत्तराखण्ड स्टूडियो के चैनल का राकेश रमेला और नीरू बोरा द्वारा अभिनित उत्तराखण्डी गीत चम्म मुखड़ी रिलीज हुआ। नदी का किनारा और खिली धूप में कौथिग के नजारे ने मेला घूमने आए जनसैलाब को खूब आकर्षित किया। मीडिया प्रभारी भुवन पाण्डेय ने बताया कि सुबह की ठण्ड के कारण ग्राहकों का झुण्ड गर्म कपड़ोें से पटे स्टॉलों की ओर रूख करने पर मजबूर हुआ जहाँ नाना प्रकार की गरम टोपियां, वास्केट (सर्दी), जैकेट, रंगबिरंगे लेडिज गरम सूट इत्यादि प्रचूर मात्रा में बिके।
सांयकालीन सत्र में दिन का सायंकालीन द्वितीय सत्र पर्वतीय महापरिषद के उपाध्यक्ष एवं सांस्कृतिक प्रभारी महेन्द्र पन्त द्वारा रचित उत्तरायणी के टाइटल सॉन्ग उत्तरैनी कौथिग मा सभन को सत्कार छ… गीत के साथ प्रारम्भ हुआ। अति विषिष्ठ अतिथि पुष्पिला बिष्ट ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रमों का उद्घाटन किया। पर्वतीय महापरिषद के अध्यक्ष गणेश जोशी व महासचिव महेन्द्र रावत ने पुष्पगुच्छ एवं मुख्य संयोजक ठाकुर सिंह मनराल व संरक्षक लाबीर सिंह बिष्ट द्वारा प्रतीक चिन्ह प्रदान कर मुख्य अतिथि का स्वागत व सम्मान किया गया। इस अवसर पर पर्वतीय महापरिषद के कोषाध्यक्ष के एस रावत, एम एस मेहता, मीडिया सलाहकार हरी’ा काण्डपाल, पी सी पन्त, आनन्द कपकोटी, चंचल सिंह बोरा, गोविन्द पाठक, मुख्य संयोजक महिला प्रकोष्ठ मंजू भास्कर ‘ार्मा, आनन्द भण्डारी, उमेद सिंह दयोपा, सुदीप जो’ाी, लक्ष्मण सिंह भण्डारी, के एन पाठक, शंकर पाण्डेय, के एन पाण्डेय, संजय पाण्डेय, वीरेन्द्र आर्या, जी डी भट्ट, एल एस धामी, बिशन दत्त जोशी, प्रदीप बिष्ट, जितेन्द्र उपाध्याय व अन्य उपस्थित रहे। सांस्कृतिक कार्यक्रम में जहां एक ओर उत्तराखण्ड से आई मेहमान कलाकार ईशा मर्तोलिया के लोक नृत्य की प्रस्तुतियों से दर्शक मंत्रमुग्ध हुए वहीं मेहमान कलाकार चन्द्रकला के तेरी मेरी प्रीत…,यू डाना का पार… व अन्य लोकगीत, राकेश जोशी के हिट दे शाली म्यार दगाड़.., राम सीता लखना.., सूवा मेरो र्डईवरा..,समधी ज्यू… और लखनऊ के लोकगायक आनन्द कपकोटी ने कौथिग में समा बांधा।





