लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम एवं सफर फाउण्डेशन की ओर से नाटक दूतवाक्यम का मंचन बौद्ध शोध संस्थान में किया गया। नाटक का निर्देशन मोहम्मद अनवर बेग ने किया। दूतवाक्यम नाटक का प्रसंग महाकाव्य ग्रन्थ महाभारत के उस समय का वर्णन है जब पाण्डव बारह वर्ष के वनवास और विराट के यहां रहकर एक वर्ष के अज्ञातवास के बाद इन्द्रप्रस्थ लौट आए और प्रतिज्ञा के अनुसार कौरवों से आधे राज्य की मांग की, तो दुर्योधन ने देने से इंकार कर दिया। तब पाण्डवों ने समझौते के लिए कृष्ण को शांति दूत बनाकर हस्तिनापुर भेजने की योजना बनाई, केशव के शांति दूत सूचना से पाण्डवों और कौरवों दोनों पक्षों में खलबली मच गयी। दोनों पक्षों में लोगों को अपने-अपने प्रतिशोध लेना था, द्रोपदी ने तो तुरन्त केशव को बुलाकर कहा- हस्तिनापुर सभा में मेरे अपमान का स्मरण आपको रहे तो उधर कौरवों में तो सभी दुर्योधन को समझाने में लगे कि वो केशव है कोई साधारण दूत नहीं।
परन्तु हस्तिनापुर राज्य सभा में केशव जब आधे राज्य की मांग करते है तब दुर्योधन देने से मना कर देता है, तब केशव केवल पाँच गाँव की मांग करते है तब अहंकारी दुर्योधन सूई की नोक के बराबर भूमि देने से मना देता है और पाण्डवों भला बुरा कहता है, केशव राज्य सभा छोड़कर जाने लगते है, तो दुर्योधन केशव को बंदी बनाने का प्रयत्न करता है तब केशव अपना विराट स्वरूप रखते है और दंड देने वाले होते है तभी सुदर्शन प्रकट होते है और कहते है आप पृथ्वी का भार उतारने आए हैं यदि इसे आज मार दिया तो सभी युद्ध से विरक्त हो जायेंगे, आपका मुख्य कार्य सिद्ध नहीं होगा।” केशव शांत हो जाते है। तब सुदर्शन प्रभु के सभी शस्त्रों को भी वापस भेज देतें है। अंत में धृतराष्ट्र क्षमा याचना करते है प्रभु उस समय क्षमा करते है और समय पर छोड़ देते है। अंतत: नाटक अहंकार का विनाश, शांति के महत्व और धर्म की विजय का संदेश देते हुए समाप्त होता है। नाटक में अहम भूमिका अभिषेक कुमार सिंह, मनोज तिवारी, पीयूष पाण्डेय, सुरेश प्रसाद, संजय शर्मा, तरुण यादव, सूरज ने निभायी।





