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लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर तनाव कायम

  • चीन ने कहा-स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में, ट्रंप ने की मध्यस्थता की पेशकश
  • सुरक्षा मामलों पर थल सेनाध्यक्ष ने शीर्ष कमांडरों के साथ की अहम बैठक

नई दिल्ली-बीजिंग। भारत-चीन के बीच सीमा पर तनाव अभी बरकरार है। लद्दाख में गालवन नाला एरिया के पास इस तनाव का असर देखने को मिल रहा है। एलएसी के पास कई सेक्टरों में चीन करीब पांच हजार जवान तैनात कर चुका है। पड़ोसी के इस कदम के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपने जवान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन और भारत के सीमा विवाद पर मध्यस्थता की पेशकश की है। इससे पहले ट्रम्प ने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की बात कही थी, जिसे भारत ने ठुकरा दिया था। उधर, चीन ने बुधवार को कहा कि भारतीय सीमा पर स्थिति पूरी तरह से स्थिर और नियंत्रण में है।

दोनों देशों के पास आपसी बातचीत के जरिये ऐसे मुद्दों को हल करने का तंत्र मौजूद है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का यह बयान वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेना में जारी गतिरोध के बीच आया है। उधर, थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे की अध्यक्षता में शुरू हुए तीन दिवसीय सम्मेलन में भारतीय सेना के शीर्ष कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख के कई क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनावपूर्ण गतिरोध सहित देश की भारत की प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों पर बुधवार को विचार-विमर्श शुरू किया।

चीन के साथ विवाद पर भारत ने कहा है कि चीनी सेना लद्दाख और सिक्किम में एलएसी पर उसके सैनिकों की सामान्य गश्ती में अवरोध पैदा कर रही है। भारत ने चीन की इस दलील को पूरी तरह खारिज कर दिया कि भारतीय बलों द्वारा चीनी पक्ष की तरफ अतिक्रमण से दोनों सेनाओं के बीच तनाव बढ़ गया।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत की सभी गतिविधियां सीमा के इसी ओर संचालित की गयी हैं और भारत ने सीमा प्रबंधन के संबंध में हमेशा बहुत जिम्मेदाराना रुख अपनाया है। उसी समय विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उधर, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के दो अनौपचारिक शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए झाओ लिजियन कहा कि हम दोनों देशों के नेताओं की बैठक के बाद बनी महत्वपूर्ण सहमति और समझौते का सख्ती से पालन कर रहे हैं।

वहीं, भारत में चीन के राजदूत सुन वीडोंग ने कहा कि भारत और चीन साथ मिलकर कोरोनावायरस से मिलकर जंग लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। बेहतर संबंध रखना दोनों देशों की जिम्मेदारी है। दोनों तरफ के युवाओं को भी यह समझना चाहिए। हमें उन चीजों को दूर रखना होगा, जो आपसी रिश्तों पर बुरा असर डाले। आपसी चर्चा के जरिए ही मतभेद सुलझाने चाहिए।

लद्दाख में हाल ही में गालवन नाला एरिया के पास चीन और भारत के बीत तनाव बढ़ गया है। एलएसी के पास कई सेक्टरों में चीन के जवान तैनात करने के बाद भारतीय सेना ने भी इन इलाकों में अपने जवान बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। पिछले हफ्ते दोनों देशों की सेनाओं के कमांडर बातचीत कर मुद्दा सुलझाने की कोशिश भी कर चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को हाईलेवल मीटिंग बुलाई। इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल, सीडीएस बिपिन रावत और तीनों सेना प्रमुख शामिल हुए। इसके बाद मोदी ने विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला से भी चर्चा की। इससे पहले लद्दाख में तनाव पर रक्षा मंत्री की सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुखों से करीब एक घंटे मीटिंग हुई थी।

अगर भारत और चीन की सेनाएं लद्दाख में आमने-सामने हुईं तो 2017 के डोकलाम विवाद के बाद ये सबसे बड़ा विवाद होगा। भारत ने पेंगोंग त्सो झील और गालवान वैली में सैनिक बढ़ा दिए हैं। इन दोनों इलाकों में चीन ने दो हजार से ढाई हजार सैनिक तैनात किए हैं, साथ ही अस्थाई सुविधाएं भी बढ़ा रहा है। चीन लद्दाख के कई इलाकों पर अपना दावा करता रहा है।

भारत-चीन बॉर्डर पर डोकलाम इलाके में दोनों देशों के बीच 2017 में 16 जून से 28 अगस्त के बीच तक टकराव चला था। हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। साल के आखिर में दोनों देशों में सेनाएं वापस बुलाने पर सहमति बनी थी। इस बीच, भारतीय सेना के शीर्ष कमांडरों ने पूर्वी लद्दाख के कई क्षेत्रों में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनावपूर्ण गतिरोध सहित देश की भारत की प्रमुख सुरक्षा चुनौतियों पर बुधवार को विचार-विमर्श शुरू किया।

सरकारी सूत्रों ने कहा कि हालांकि, मुख्य जोर पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर होगा जहां भारतीय और चीनी सेनिक पेंगोंग त्सो, गलवान घाटी, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आमने-सामने हैं। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, पाकिस्तान और चीन के साथ सीमाओं सहित भारत की सुरक्षा चुनौतियों के सभी पहलुओं पर कमांडरों द्वारा लंबी चर्चा की जाएगी।

भारत और चीन दोनों ने इस क्षेत्र में सभी संवेदनशील इलाकों में अपनी उपस्थिति काफी बढ़ा दी है। यह इस बात का संकेत है कि कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं है। पूर्वी लद्दाख में स्थिति तब बिगड़ी जब करीब 250 चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच पांच मई को हिंसक झड़प हुयी। स्थानीय कमांडरों के स्तर पर बैठक के बाद दोनों पक्ष अलग हुए। इसके बाद नौ मई को उत्तरी सिक्किम में भी इसी तरह की घटना हुई थी।

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