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पुरुषोत्तम माह में नाम जप, दान, हरिकीर्तन से मिलता है सौ गुना फल : सपना गोयल

श्री परमानंद हरि हर मंदिर में हुआ अनुष्ठान

लखनऊ। ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुवाई में देवा रोड स्थित श्री परमानंद हरिहर मंदिर परिसर में पुरुषोत्तम मास का महात्म्य पर सत्संग हुआ। इसमें सपना गोयल ने संदेश दिया कि पुरुषोत्तम मास बड़ा ही पावन महीना है। यह तीन साल में एक बार आता है। इसमें विशेष रूप से गृहस्थ जो दिन रात परिवार के लालन पालन में लगे रहते हैं वे भी पुरुषोत्तम माह में नाम जप, दान और हरिकीर्तन कर सौ गुना फल अर्जित कर सकते हैं।
सत्संग में सपना गोयल ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, असुरराज हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि साल के बारह महीनों में उसकी मृत्यु न हो। ऐसे में भगवान विष्णु ने तेरहवें महीने अर्थात अधिक मास की रचना की और उसी के प्रभाव से उसका अंत संभव हुआ था। सर्वविदित है कि भगवान विष्णु जी के नरसिंह अवतार ने हिरण्यकश्यप को न दिन में, न रात में, न घर के भीतर, न बाहर, न मनुष्य रूप में, न पशु रूप में और न किसी अस्त्र-शस्त्र से उसका वध किया था। प्राचीन मान्यता के अनुसार, इस अतिरिक्त महीने का कोई अधिष्ठाता देवता नहीं था। इसलिए लोग इसे मलमास कहकर शुभ कार्यों के लिए अनुपयुक्त मानने लगे। इससे दु:खी होकर अधिक मास भगवान विष्णु की शरण में गए। तब भगवान विष्णु, जिन्हें पुरुषोत्तम अर्थात श्रेष्ठतम पुरुष भी कहा जाता है, ने उसे अपना नाम प्रदान किया और कहा कि ह्लअब से तुम पुरुषोत्तम मास कहलाओगे। तुम्हारे दौरान किए गए जप, तप, दान और भक्ति का फल विशेष होगा। इस प्रकार भगवान विष्णु ने स्वयं इस मास को पुरुषोत्तम मास नाम दिया, और यह आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाने लगा। यह कथा मुख्यत: पद्म पुराण और पुरुषोत्तम मास महात्म्य में वर्णित है। मान्यता है कि इस माह में पवित्र नदियों में स्नान, भागवत कथा श्रवण और विष्णु मंत्रों जैसे ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करने से व्यक्ति जन्मों-जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है। यह माह सांसारिक इच्छाओं से मुक्त होकर निष्काम भाव से भगवान की सेवा करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस माह में जरूरतमंदों, ब्राह्मणों और साधुओं को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना अत्यधिक शुभ माना गया है। इस मास में हरिद्वार, वृन्दावन, या प्रयागराज जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान और परिक्रमा करने का विशेष महत्व होता है वहीं श्रीमद्भागवत कथा, विष्णु सहस्त्रनाम और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ करना फलदायी होता है।
सपना गोयल ने इसके साथ ही संदेश दिया कि पुरुषोत्तम मास में सुंदरकांड का पाठ करने से भगवान विष्णु और बजरंगबली दोनों की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। यह पाठ विशेष रूप से भक्तों को मानसिक शांति, आत्मविश्वास और सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति दिलाता है। सुंदरकांड के पाठ से कुंडली में ग्रहों के अशुभ प्रभाव शांत होते हैं वहीं शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, तथा बीमारियों से रक्षा होती है। 17 मई 2026 से शुरू हुआ पुरुषोत्तम मास 15 जून तक रहेगा। पुरुषोत्तम मास के अंतिम पांच दिनों को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है, जिसे ‘पंचरात्रि’ भी कहते हैं। इस दौरान आप शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए परिक्रमा करें। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की कृपा पाने के लिए इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम या श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें। अंतिम दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या मौसमी फलों का दान करना विशेष फलदायी होता है। सपना गोयल ने बताया कि सुंदरकांड महा अभियान के अंतर्गत अब उन्होंने सबसे वृहद संकल्प लिया है कि अगस्त माह में झूलेलाल वाटिका में 11 हजार मातृशक्तियों का वृहद सामूहिक सुंदरकांड पाठ अनुष्ठान सम्पन्न करवाया जाए।

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