नाटक ‘मसाज’ में राकेश बेदी ने दिखाया जीवन का संघर्ष
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह में गुरुवार को नाटक ‘मसाज’ का भावपूर्ण मंचन किया गया। फिल्म धुरंधर से एक बार फिर चर्चा में आये राकेश बेदी गुरुवार को राजधानी लखनऊ पहुंचे और अपने अभिनय से अवध की शाम को खास बना दिया। मसाज कहानी है एक छोटे शहर के आम शख्स हैपी कुमार की जो महानगरी मुंबई में अपने सपनों की तलाश में आता है। हैपी की जेब खाली हैं, लेकिन आंखों में सपना हीरो बनने का है। नाटक हैपी के किस्मत और बॉलीवुड में कलाकार बनने आने वालों के स्ट्रगल पर आधारित था। नाटक में हास्य का पुट भी था तो एक आम आदमी की अपने सपनों को पूरा करने की जद्दोजहद भी दिखाई गई। इस नाटक में राकेश बेदी 20 से अधिक अलग-अलग पात्र निभाते हैं।
नाटक का मुख्य किरदार हैपी कुमार मुंबई हीरो बनने आता है। यहां उसकी मुलाकात सर्प कथाओं और सेक्स आधारित विषयों पर फिल्में बनाने वाले निर्देशक कोहली से होती है। वह उसे अपना फोर्थ असिस्टेंट डायरेक्टर बना लेता है। इसके बाद हैपी को दिए जाते हैं फिल्म निर्देशन के दौरान कोहली के निजी काम करने को। इसके लिए उसे पगार भी नहीं मिलती। इससे परेशान होकर वह निर्देशक के पास जाता है और उसकी फिल्म में रोल मांगता है। हालांकि वह उसे अपनी अगली फिल्म में छोटा सा रोल देने की बात कहता है, लेकिन इससे पहले वह उससे अपने निजी काम करवाता रहता है। हैपी मुंबई में गुजर बसर के लिए साथ-साथ एक नौकरी करता है। वह एक जिम में बतौर ट्रेनर काम शुरू करता है। वहीं साथ ही कोहली के साथ उसके फोर्थ असिस्टेंट के काम भी करता रहता है। काफी स्ट्रगल के बावजूद उसे फिल्मों में तो काम नहीं मिलता, लेकिन जिम के बतौर ट्रेनर वह खूब नाम कमा लेता है। यहीं काम करते करते वह लोगों की मसाज करनी शुरू करता है। जिम में आने वालों को यह खूब पसंद आती है। इसके बाद हैपी मिज में ट्रेनर कम मसाज करने वाले के तौर पर ज्यादा चर्चित हो जाता है। यहीं से हैपी का सफर शुरू होता है एक मसाज करने वाले के तौर पर। मसाज करने वाले किरदार के तौर पर वह समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों से रूबरू होता है। एक मसाज करने वाले के तौर पर हैपी खूब नाम और शोहरत कमाता है।
लगभग दो घंटे का यह नाटक समाज के उन पक्षों को सामने लाता है, जिन पर यह सामाजिक तानाबाना खड़ा हुआ है और जिंदगी की व्यावहारिक सच्चाइयों को दर्शकों के सामने लाता है।





