लखनऊ। प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने मंगलवार को प्राइवेट यूनिवर्सिटी खोले के लिए मिले सभी प्रस्तावों का निस्तारण पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ निश्चित समयसारिणी के अनुसार सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने यह निर्देश निजी क्षेत्र के तहत विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए लेटर ऑफ़ इंटेंट (आशय पत्र) जारी करने के संबंध में गठित समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिये।
बैठक में बताया गया कि अब कुल 31 विचाराधीन प्रस्तावों के सापेक्ष 13 प्रस्तावों सर्वदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़, कृष्ण लाल मेमोरियल यूनिवर्सिटी गे्रटर नोएडा, पंडित दीन दयाल उपाध्याय फरह विश्वविद्यालय मथुरा, अलीगढ़ विश्वविद्यालय, अलीगढ़ (एएसीएन), एसआरडी यूनिवर्सिटी फिरोजाबाद, पीके यूनिवर्सिटी मथुरा, दून यूनिवर्सिटी सहारनपुर, पीएसआईटी कानपुर, एसआरएम यूनिवर्सिटी गाजियाबाद, आरकेजी यूनिवर्सिटी पिलखुवा हापुड़, डाॅ विजय इन्टरनेशनल यूनिवर्सिटी, वाराणसी, श्री मूर्ति ठाकुर मदन मोहन केदार महंत नारायण यूनिवर्सिटी मिर्जापुर और महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी कानपुर की भूमि का अद्यतन मानक पूर्ण न किये जाने के कारण निरस्तीकरण आदेश जारी कर दिये गये हैं।
इसके अलावा तीन विश्वविद्यालयो विवेक यूनिवर्सिटी बिजनौर, एसडीजीआई यूनिवर्सिटी गाजियाबाद और बीके यूनिवर्सिटी मथुरा के प्रस्ताव मानक के अनुरूप न होने के कारण निरस्तीकरण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इसके अलावा छह विश्वविद्यालयों मौलाना रूरल यूनिवर्सिटी, सीतापुर, मेघ सिंह विश्वविद्यालय, आगरा, केएन मोदी विश्वविद्यालय गाजियाबाद, महर्षि रामायण अयोध्या, एसआर यूनिवर्सिटी लखनऊ और जेबीएम यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा को भूमि संबंधी मानक पूरा करने के लिए 31 दिसम्बर तक का समय दिया गया है।
इसके अतिरिक्त रामा विश्वविद्यालय हापुड़ का निरीक्षण किया जा चुका है। एमिटी यूनिवर्सिटी नोएडा और इमानुएल यूनिवर्सिटी रायबरेली के निरीक्षण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जेएसएस यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा, महवीर यूनिवर्सिटी मेरठ, जीएस यूनिवर्सिटी हापुड़, राजश्री यूनिवर्सिटी बरेली, फारूक हुसैन यूनिवर्सिटी एत्मादपुर आगरा और मेजर एसडी सिंह विश्वविद्यालय फर्रूखाबाद से मिले प्रस्ताव परीक्षणाधीन या प्रक्रियाधीन है।





