लखनऊ। अपने अदम्य साहस के बलबूते उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद पर रहे डीपीजी सुलखान सिंह ने काफी जनहित में न केवल काम किये बल्कि आम जनता के बीच अपनी खास पहचान बनायी। आईपीएस के होने के नाते अपनी नौकरी के दौरान उन्होंने कई कुख्यात अपराधियों और माफिया को उनकी करनी की सजा दिलायी। अब वह सेवानिवृत्त होने के बाद बुंदेलखंड के लोगों को तमाम सुख-सुविधाओं से तृप्त करना चाहते है ताकि वहां के लोगों का जन-जीवन भी काफी सुगम हो सकें।
ऐसे में उन्होंने एक राजनीतिक पार्टी बनाने का निर्णय लिया है। इस पार्टी को बनाने का उद्देश्य ही केवल बुंदेलखंड का विकास करना है और इसके लिए उन्होंने बुंदेलखंड का अलग राज्य बनाने की मांग की है। पार्टी बनाने और अपने उद्देश्य को पाने के लिए उनकी तैयारियों के विषय में वॉयस आॅफ लखनऊ के वरिष्ठ संवाददाता शैलेन्द्र श्रीवास्तव से विशेष बातचीत की।
-: पेश है बातचीत के प्रमुख अंश :-
आपका नये राजनीतिक दल बनाने का क्या उद्देश्य है ?
बुंदेलखंड अलग राज्य स्थापित करने के लिए बीते 40 सालों से कई आंदोलन हुए। इस आंदोलन में कई शांतिपूर्ण तो कुछ हिंसक आंदोलन हुए लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला क्योंकि पिछड़े और गरीब लोग कितने दिन आंदोलन कर सकते है। इससे राजनीतिक दलों को कोई फर्क नहीं पड़ता। बसपा ने बुंदेलखंड राज्य बनाये जाने का समर्थन किया था लेकिन वह भी ठंडे बस्ते में चला गया। इन सबको देखते हुए राजनीतिक पार्टी बनाने का निर्णय लिया। राजनीतिक दलों में बुंदेलखंड को लेकर भय जरूरी है कि यदि विकास नहीं हुआ तो वोट कट जायेंगे तब कुछ हलचल होगी।
आपने राजनीतिक दल को किस नाम से बना रहे है?
हम बुंदेलखंड राज्य अलग बनाने की मांग कर रहे है इसलिए बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी के नाम से ही राजनीतिक दल बना रहे है। पार्टी बनाने के लिए जल्द ही रजिस्ट्रेशन करायेंगे तो उम्मीद है कि दो-तीन माह में रजिस्टर्ड हो जायेगी। फिर 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी मैदान में उतारे जायेंगे।
यदि लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी का रजिस्ट्रेशन नहीं आया तो क्या करेंगे?
हमारा मुख्य उद्देश्य राजनीतिक दल बनाने का बुंदेलखंड राज्य की स्थापना करना है और राजनीतिक प्रभाव के बिना यह सम्भव नहीं दिखता। इसलिए यदि पार्टी का सिम्बल नहीं मिल पाता तो भी हमें बुंदेलखंड की आठ लोकसभा के लिए अच्छे प्रत्याशी मिल जायेंगे और हम सभी आठों लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे।
आप बुंदेलखंड को अलग राज्य क्यों बनना चाहते है, जबकि भाजपा सरकार का कहना है कि काफी विकास कार्य हुए और लगातार हो रहे है?
बुंदेलखंड में राजनीति एजेंडे के अनुसार ही विकास होता है जोकि नाकाफी है। भाजपा सरकार के किये गये विकास का धरातल से कोई लेना-देना नहीं है। विकास की परिभाषा तब पूर्ण होती है जब किसान को सिंचाई और हर युवा के हाथ में रोजगार हो। इसके बिना विकास की अवधारणा को पूरा नहीं किया जा सकता है। हर घर नल लग जाने से कोई विकास नहीं होता। बुंदेलखंड की जमीन सूखी हुई है, वहां पर बरसात के पानी के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है। केन और बेतवा नदी के लिंक का प्रस्ताव वर्ष 2015 से जस का तस पड़ा हुआ है किसी सरकार ने रूचि नहीं दिखायी।
केन-बेतवा नदी के लिंक से बुंदेलखंडवासियों को क्या लाभ मिलेगा?
यदि वर्ष 2015 की योजना केन-बेतवा नदी लिंक पूरी हो जाती है तो इससे किसान को सिंचाई का लाभ मिलता और इसके जरिये वहां के लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त होते लेकिन इस पर किसी सरकार ने कोई रूचि नहीं दिखायी।
यदि आप लोकसभा चुनाव के चुनाव में अपने प्रत्याशी उतराते है तो कितना प्रभाव पड़ने की सम्भावना है?
हम पहले ही बता चुके है कि हमारा उद्देश्य बुंदेलखंड राज्य की स्थापना करना है इसके लिए ही हम राजनीति प्रभाव को बनना चाहते है। अभी हमारी शुरूआत हुई है और यदि दो से चार प्रतिशत वोट भी जनता हमें देती है तो निश्चित रूप से अन्य राजनैतिक दलों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। हम कोई भी मौका अब नहीं छोड़ना चाहते।
फिलहाल अभी पार्टी बनाने का काम किस स्तर पर है और किस प्रकार के लोगों आप पार्टी से जोड़ना चाहते है?
अभी मैंने पार्टी बनाने की घोषणा की है और पार्टी बनाने के ऐलान से ही कई फोन आ रहे हैं, इसमें काफी सकारात्मक परिणाम मिलने की सम्भावना है। अभी कारवां बनाने की तैयारी चल रही है लेकिन यह तय है कि बुंदेलखंड राज्य की स्थापना से पहले यह कदम रूकने वाले नहीं है।





