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सुख-समृद्धि का प्रतीक पिठोरी अमावस्या आज

पितरों के निमित्त किए गए कर्म और संकल्प अत्यंत फलदायी होते हैं
लखनऊ। सनातन धर्म में प्रत्येक अमावस्या तिथि विशेष मानी जाती है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, 22 अगस्त को दिन में 11 बजकर 55 मिनट पर भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि की शुरूआत होगी। वहीं, 23 अगस्त को दिन में 11 बजकर 35 मिनट पर भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि समाप्त होगी। इसे पितरों की शांति, परिवार की समृद्धि और संतान की मंगलकामना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माता दुर्गा, अष्टमातृका और पितरों की विशेष पूजा का विधान है। पिठोरी शब्द संस्कृत के पिष्टक से बना है जिसका अर्थ होता है आटे या पिठ्ठी से बनी हुई वस्तु। इसी कारण इस दिन विशेष प्रकार की पिठ्ठी या आटे से बने प्रतिमाओं और पकवानों का उपयोग पूजा में किया जाता है। ग्रंथों के अनुसार, इस दिन पितरों के निमित्त किए गए कर्म और संकल्प अत्यंत फलदायी होते हैं।

पिठोरी अमावस्या का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों का स्मरण और तर्पण करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि पितरों की कृपा से संतान दीघार्यु, स्वस्थ और तेजस्वी होती है। पिठोरी अमावस्या का संबंध माता दुर्गा और मातृशक्ति से भी माना गया है। लोकमान्यता है कि इस दिन माताएं अपनी संतानों के दीर्घ जीवन, सुख-समृद्धि और कुल की रक्षा के लिए विशेष व्रत रखती हैं। इसके अतिरिक्त इस दिन पितरों के निमित्त दान करने से वंशजों के जीवन से अनेक प्रकार के संकट दूर होते हैं।

पिठोरी अमावस्या पर क्या करें
इस दिन प्रात:काल स्नान करके पवित्र नदी या सरोवर में अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। आटे से बनी 64 मातृकाओं की मूर्तियाँ या पिंड बनाकर उनकी पूजा की जाती है। संतानवती स्त्रियां व्रत रखकर माता दुर्गा और मातृशक्ति की उपासना करती हैं। पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्धकर्म करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, तेल, दीपक तथा पका भोजन दान करना शुभ माना जाता है।
दिनभर संयम और सात्विक आहार का पालन करना चाहिए।

पिठोरी अमावस्या पर क्या न करें
इस दिन मांस, मदिरा और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है। किसी भी प्रकार के झूठ, क्रोध, छल या कपट से बचना चाहिए। पितरों के दिन होने से इस तिथि पर किसी भी शुभ कार्य जैसे विवाह या मांगलिक कार्यों का आयोजन नहीं करना चाहिए। पशु-पक्षियों को कष्ट पहुंचाना और पेड़-पौधों को काटना अशुभ माना जाता है। रात्रि में अनावश्यक यात्रा और विवाद से बचना चाहिए।

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