अस्तपालों में जांच व इलाज के लिए मारामारी
वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। डेंगू अब जानलेवा होता जा रहा है। सोमवार को इससे पीड़ित एक महिला की मौत हो गयी। वहीं बीते चौबीस घंटों में इसकी चपेट में 30 और लोग आ गये। स्थिति यह है कि शहर में इन दिनों डेंगू के साथ बुखार के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में जांच व इलाज के लिए मारामारी मची है। वहीं गम्भीर मरीजों को भर्ती कराने में भी तीमारदारों के पसीने छूट रहे हैं।
गीतापल्ली निवासी 34 वर्षीय पवित्रा उपाध्याय बीते कई दिनों से बुखार से पीड़ित थी। घर के पास डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने डेंगू जांच कराने की सलाह दी। जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि होने के बाद दवा लेने पर भी आराम नहीं मिली। हालत बिगड़ने पर परिजन केजीएमयू के ट्रामा सेन्टर लेकर पहुंचे। जहां इलाज के दौरान सोमवार को उनकी मौत हो गयी। वहीं बीते चौबीस घंटो के दौरान शहर के अलीगंज, इन्दिरानगर, चिनहट व एनके रोड मेंं 4-4, सिल्वर जुबली, चन्दरनगर व ऐशबाग में 3-3, टूडियागंज व रेडक्रास में 2-2 और मोहनलालगंज में 1 मरीज की डेंगू रिपोर्ट पॉजिटिव आयी। डेंगू से बढ़ रही रफ्तार से केजीएमयू, लोहिया संस्थान समेत सभी सरकारी अस्पतालों में बुखार के मरीजों का दबाव बढ़ गया है।
बलरामपुर, सिविल, लोकबंधु, भाऊराव देवरस, आरएलबी और सीएचसी की ओपीडी व इमरजेंसी में बुखार के तीन हजार मरीज पहुंच रहे हैं। छोटे व बड़े अस्पतालों में रोज करीब 300 मरीज भर्ती हो रहे हैं। कई लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग इन्हें डेंगू से मौत मानने से इनकार कर रहा है।
केजीएमयू के मेडिसीन विभाग के डा. डी.हिमांशु का कहना है कि तीन से चार दिन के बुखार में ही लोगों की प्लेटलेट्स तेजी से घट रही हैं। जांच में कई मरीजों को डेंगू व मलेरिया निकल रहा है। ओपीडी से करीब 30 मरीज भर्ती कराये जा रहे हैं। इमरजेंसी में बुखार के मरीज सीधे भर्ती हो रहे हैं।
लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी का कहना कि रोज करीब दो हजार मरीज ओपीडी में देखे जा रहे हैं। इनमें से करीब 200 बुखार के होते है। इमरजेंसी में अधिकांश मरीज बुखार के ही आ रहे हैं। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डा. नरेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि ओपीडी में 30 फीसदी मरीज बुखार के आ रहे हैं। इस बार बुखार के मरीजों में कमजोरी और बदन दर्द की समस्या ज्यादा हो रही है।





