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एक बार फिर पूरा यादव कुनबा हुआ एकजुट, सियासी जमीन की गयी तैयार

शैलेन्द्र श्रीवास्तव/लखनऊ। सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव की 85वीं जयंती पर मुख्य कार्यक्रम बुधवार को सैफई में हुआ। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नेताजी की जन्मभूमि सैफई में नेताजी की याद में भव्य स्मारक बनाने के लिए भूमि पूजन किया। यह स्मारक 8.3 एकड़ भूमि पर नेताजी की समाधिस्थल पर तैयार किया जायेगा। स्मारक शिलान्यास समारोह में एक बार फिर यादव कुनबा एक साथ नजर आया। इस अवसर पर शिवपाल ने एकजुटता का संदेश दिया तो वहीं प्रो. राम गोपाल यादव ने राजनीति का ककहरा पढ़ाया।

इस अवसर पर मंच से सपा राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने परिवार और पार्टी में एकजुटता का संदेश देते हुए कहा कि छोटी-छोटी बातों को भूलाना होगा और त्याग का भाव लाना होगा। साथ ही उन्होंने पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव और भतीजे पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में हुए जनहित कार्यों की चर्चा करते हुए सराहनीय बताते हुए कहा कि अखिवलेश में मुलायम सिंह का अक्स दिखता है और कार्यकर्ताओं को भाजपा से होशियार रहने की हिदायत दी।

शिवपाल और अखिलेश यादव के बीच हुई तल्खी के बाद ये पहली बार था कि जब शिवपाल सिंह यादव ने परिवार और पार्टी के प्रति समर्पण का भाव दिखाने पर सभी को जोर दिया और एकजुटता होने की बात कहीं। शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव के बीच 2017 में शुरू हुई थी। इस दौरान इस बात की चर्चा जोरशोर से हुई और परिवार के बीच झगड़ा सड़क तक आ पहुंचा। इन सबके बाद राजनीति में माहिर खिलाड़ी कहे जाने वाले शिवपाल सिंह यादव ने सपा से न केवल किनारा किया बल्कि अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) तक खड़ी कर दी हालांकि पार्टी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में कुछ असर नहीं दिखा पायी लेकिन शिवपाल ने हार नहीं मानी और लगातार पार्टी के विस्तार को लेकर जुटे रहे।

इस दौरान सपा में उनके साथ रहे सभी ने प्रसपा से जुड़ते चले गये लेकिन इसके बाद 2022 के चुनाव में एक बार फिर उनका परिवार और भतीजे अखिलेश यादव के प्रति झुकाव दिखा और दोनों ने साथ विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया, इस बीच सीटों को लेकर एक बार फिर बात नहीं बनी। उनके पार्टी सिम्बल से कोई भी टिकट नहीं दिया गया और शिवपाल सिंह ने भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, उन्होंने बड़ा दिल दिखाते हुए पार्टी के प्रति मोह नहीं दिखाया। लेकिन इसके बावजूद फिर चर्चाएं उठने लगी कि शिवपाल को उचित सम्मान नहीं दिया गया, जिस कारण वह काफी नाराज भी दिखे। तल्खी बढ़ी तो अपनी पार्टी की तरफ रूख कर गये और पार्टी को मजबूत बनाने का संदेश दिया।

इधर मुलायम सिंह यादव के निधन हुआ तो यादव परिवार एकजुट हो गया। इस दौरान अखिलेश के कंधे से कंधा मिलाकर अगर अखिलेश की बराबरी पर खड़ा रहा तो वह चाचा शिवपाल थे। जिन्होंने अखिलेश के हर कदम पर उनके साथ खड़े दिखे और इसके बाद अखिलेश यादव ने भी बढ़ा दिल दिखाते हुए चाचा की पार्टी का विलय सपा में कराया और सम्मानजनक पद दिया।

सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी सीट खाली हुई। शिवपाल के साथ जुड़ते ही मैनपुरी चुनाव के लिए मैदान पर उतर गये। इस सीट पर अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव चुनाव मैदान पर उतरी और अच्छे वोटों से जीत हासिल की। इस जीत पर शिवपाल की मेहनत की चर्चा ही नहीं बल्कि बहुत तारीफ भी हुई।

इस अवसर पर सपा प्रमुख राष्ट्रीय महासचिव प्रो. राम गोपाल यादव ने पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के संघर्ष और पार्टी को खड़ा करने के संघर्ष के बारे में कार्यकर्ताओं को जानकारी दी और उन्हें राजनीति का ककहरा पढ़ाया। इस दौरान उन्होंने अखिलेश यादव के प्रधानमंत्री बनने रास्ता बताते हुए कहा कि करीब 40 लोकसभा सीटों पर सपा के प्रत्याशी विजय हो तो प्रधानमंत्री की बात की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं को जुटना पड़ेगा तभी यह संभव हो पायेगा और यदि अखिलेश यादव को प्रधानमंत्री नहीं बनाया गया तो और रास्ते भी तलाशे जा सकते है, इसके लिए खुद का मजबूत किया जाना जरूरी है।

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