नयी दिल्ली। सरकार पश्चिम एशिया संकट के बीच कंपनियों के लिए आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) जैसी व्यवस्था शुरू करने पर विचार कर रही है। इसके तहत कर्ज गारंटी और बिना कुछ गिरवी रखे कर्ज उपलब्ध कराया जा सकता है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
सरकार ने 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत आपात ऋण सुविधा गारंटी योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 वैश्विक महामारी से प्रभावित सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और अन्य पात्र इकाइयों को परिचालन दायित्वों को पूरा करने तथा कारोबार फिर से शुरू करने में सहायता देना था।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग में अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह ने यहां आयोजित ‘सीआईआई एमएसएमई लीडरशिप समिट 2026’ को संबोधित करते हुए कहा, ईसीएलजीएस जैसी व्यवस्था लाने पर विचार जारी है जिसमें बिना कुछ गिरवी रखे ऋण, ऋण गारंटी, कर्ज पुनर्गठन और ऋण स्थगन जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि कच्चे माल की खरीद के लिए एनएसआईसी (राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम लि.) कार्यक्रम के तहत भी काम जारी है। इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और अन्य नियामकों से कुछ नियामकीय राहत देने पर भी विचार किया जा रहा है। सिंह ने उद्योग से इन प्रस्तावित उपायों पर प्रतिक्रिया भी मांगी।
पहले लागू आपात ऋण गारंटी योजना में लगभग सभी आर्थिक क्षेत्र शामिल थे और इसके तहत सदस्य ऋण संस्थानों (एमएलआई) द्वारा दिए गए ऋण पर 100 प्रतिशत गारंटी दी जाती थी।
इस योजना के तहत उधारकर्ताओं को आसानी से ऋण उपलब्ध कराया गया। बैंक बिना किसी नए मूल्यांकन के मौजूदा ऋण के आधार पर पहले से स्वीकृत अतिरिक्त ऋण देते थे। ऋण लागत को कम करने के लिए ब्याज दर पर भी सीमा तय की गई थी और बिना किसी प्रसंस्करण शुल्क, पूर्व-भुगतान शुल्क और गारंटी शुल्क के ऋण स्वीकृत किए गए थे। यह योजना 31 मार्च, 2023 तक जारी रही।





