पटना। बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज करते हुए जनता दल (यू) के सुप्रीमो नीतीश कुमार ने बृहस्पतिवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह अवसर न सिर्फ राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिला। शपथग्रहण समारोह में देश की शीर्ष राजनीतिक हस्तियों की उपस्थिति ने इसे और अधिक भव्य बना दिया।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा, राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी विशेष रूप से पटना पहुंचे और इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। गांधी मैदान में उत्साह, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक सक्रियता का अनूठा संगम देखने को मिला।
नीतीश कुमार के साथ ही भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने भी बिहार के मंत्री पद की शपथ ली। सम्राट चौधरी को अनुभवी और तेजतर्रार नेताओं में गिना जाता है, और उनका मंत्रीमंडल में शामिल होना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे ने भी मंत्री पद की शपथ लेकर राजनीतिक पारी का नया अध्याय शुरू किया। उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने को सामाजिक संतुलन की दृष्टि से अहम कदम बताया जा रहा है।
राजग नेतृत्व मानता है कि नीतीश कुमार की यह नई पारी अनुभव, स्थिरता और सुशासन के एजेंडे को आगे बढ़ाएगी। शपथ ग्रहण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में सरकार विकास, रोजगार सृजन, शिक्षा और आधारभूत संरचना पर विशेष ध्यान देगी।
बिहार में यह शपथ ग्रहण समारोह केवल सत्ता परिवर्तन का क्षण नहीं था, बल्कि राजनीतिक निरंतरता और गठबंधन की मजबूती का भी प्रतीक बना। नीतीश कुमार की 10वीं पारी राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।





