इस विभाग से उस विभाग दौड़ाते रहे डॉक्टर
वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बदहाल व्यवस्था का खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। गैंगरीन से आधे सड़ चुके पैर के इलाज के लिए परिजन नवजात को लेकर करीब आठ घंटे भटकते रहे लेकिन यहां डॉक्टर उपचार की बजाय इस विभाग से उस विभाग दौड़ाते रहे। आखिरकार थकहार परिजन बच्चे को लेकर वापस लौट गये।
रायबरेली निवासी अंकित मिश्रा ने बताया कि बीते एक माह पूर्व उनके भांजे पीषूय का जन्म हुआ था। जन्म से समय बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ था। पैदा होने के करीब पन्द्रह दिनों बाद उसका एक पैर तलवे से काला पड़ने लगा। धीरे-धीरे यह कालापन बढ़ने लगा। इसके बाद उन्नाव में स्थानीय डॉक्टर को दिखाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ और आधा पैर काला पड़ गया। फिर बच्चे को लेकर रायबरेली के एम्स पहुंचे, जहां कुछ दवाएं दी गयी। किसी ने केजीएमयू में इलाज कराने की सलाह दी तो 25 अगस्त को बच्चे को लेकर करीब शाम चार बजे ट्रामा सेन्टर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने पीडियाट्रिक विभाग भेज दिया।
पीडियाट्रिक विभाग में करीब दो घंटे इंतजार के बाद डॉक्टरों ने देखा और कहा कि यह प्लास्टिक सर्जरी विभाग का मामला है और वहां रेफर कर दिया। बच्चे को लेकर परिजन प्लास्टिक सर्जरी विभाग पहुंचे, जहां करीब चार घंटे बाद बाद डॉक्टर आये और बच्चे को वापस फिर ट्रामा सेन्टर भेज दिया। ट्रामा सेन्टर में परिजनों को चौथे तल पर भेजा गया। वहां भी सही जवाब न मिलने पर परिजन हताश होकर वापस लौट गये। परिजनों का कहना है कि केजीएमयू में बेहतर इलाज मिलेगा, यह सोचकर यहां आये थे लेकिन यहां निराशा ही हाथ लगी। पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. जेडी रावत मामले की जानकारी होने से इंकार किया है।





