पटना के राजभवन में बुधवार को आयोजित एक ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो राज्य के राजनीतिक इतिहास में भाजपा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है। सम्राट चौधरी इस गरिमामय पद पर आसीन होने वाले भाजपा के पहले नेता बन गए हैं। उन्हें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस परिवर्तन ने न केवल सत्ता के शीर्ष नेतृत्व को बदल दिया है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के समीकरणों को भी पूरी तरह से नए सिरे से परिभाषित कर दिया है।
यह शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की एकजुटता का एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन भी था। मंच पर राजग के शीर्ष नेताओं की उपस्थिति ने गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया। समारोह में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, चिराग पासवान और निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा राजग के सभी विधायकों और अन्य सहयोगी दलों के नेताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सत्ता के इस हस्तांतरण को बेहद सहज और रणनीतिक माना जा रहा है। नीतीश कुमार, जो अब राज्यसभा सदस्य की भूमिका में नज़र आएंगे, ने मंगलवार को ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर अपने मंत्रिमंडल को भंग कर दिया था। गौरतलब है कि पिछली सरकार में सम्राट चौधरी उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और उनके पास गृह मंत्रालय जैसा महत्वपूर्ण विभाग था।
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी प्रभावशाली रहा है। साल 2017 में भाजपा का दामन थामने के बाद उन्होंने संगठन में अपनी पकड़ बेहद तेजी से मजबूत की। मंगलवार को भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया था। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए भाजपा संसदीय बोर्ड ने शिवराज सिंह चौहान को ‘केंद्रीय पर्यवेक्षक’ के रूप में नियुक्त किया था, ताकि सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सके। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में अब भाजपा बिहार में मुख्य भूमिका में आ गई है, जिससे राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक दिशा में व्यापक बदलाव की उम्मीद की जा रही है। बिहार की जनता और राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर नजर टिकाए हुए हैं कि नए मुख्यमंत्री की प्राथमिकताएं क्या होंगी और वे राज्य के विकास एजेंडे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।





