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दो-तीन साल से जो मेहनत की, उसी का फल मिल रहा है : मोना सिंह

लखनऊ। ‘मेरी जिंदगी का यह अब तक सबसे बेहतरीन अनुभव है। सबसे अच्छा वक्त है कि मुझे इतने सारे अलग-अलग किरदार करने को मिल रहे हैं। मैं यही करने मुंबई आई थी और खुश हूं कि अपना यह सपना अब भी जी रही हूं।’ चहकती आवाज में यह खुशी जाहिर करने वाली अदाकारा हैं मोना सिंह। छोटे पर्दे की वो ‘जस्सी’, जो आज फिल्मों और ओटीटी की सबसे भरोसेमंद एक्ट्रेसेस में से एक है। साल की पहले दो महीने में ही ‘हैपी पटेल: खतरनाक जासूस’ और ‘बॉर्डर 2’ जैसी फिल्मों के अलावा वह वेब सीरीज ‘कोहरा 2’ में पुलिस आॅफिसर धनवंत कौर के कॉम्प्लेक्स किरदार के लिए वाहवाही बटोर चुकी हैं। अब जल्द ही उनकी फिल्म ‘सूबेदार’ भी ओटीटी पर आने वाली है। मोना अपने करियर के इस दौर को सबसे बेहतरीन मानती हैं। वह कहती हैं, ‘बहुत अच्छा लग रहा है कि दो-तीन साल जो इतनी मेहनत की है, उसका फल अब सामने आ रहा है।’
मोना की हालिया वेब सीरीज ‘कोहरा 2’ की नायिका धनवंत, निजी जिंदगी के झंझावातों से जूझते हुए भी शिद्दत से ड्यूटी निभाती है, फिर भी जरा सी चूक पर उसकी प्रतिभा पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। क्या मोना कभी खुद को साबित करने के ऐसे अनुभव से गुजरी हैं? इस पर वह कहती हैं, ‘यह कहानी हम सभी औरतों की है। हमें हर कदम पर बताया जाता है कि ये मत करो। इधर मत जाओ। ये मत पहनो। इतना मत हंसों। इससे शादी करो, उससे मत करो। यहां काम करो, यहां मत करो। हमें हमेशा बताया गया है, दबाया गया है पर अब वक्त खुलकर बोलने का है।’ मोना आगे कहती हैं, ‘शो में भी यही दिखाया गया है कि भले ही हम पंजाब में हैं, पुरुषसत्तात्मक समाज में हैं, पर कोई भी किरदार चुप नहीं है। सभी औरतें अपनी लड़ाई अपने तरीके से लड़ रही हैं, जो बहुत ही इंस्पायरिंग है कि अपने लिए खुद खड़े रहो। डटे रहो। आपको बचाने कोई नहीं आ रहा है। ये आपकी लड़ाई है तो लड़ते रहो। जिंदगी एक ही है और छोटी है तो अच्छे से खुलकर जियो। बिना किसी को कोई जवाब दिए। मैं इसी फंडे में यकीन करती हूं कि एक ही जिंदगी है, अच्छे से जी लो। मुझे किसी चीज का पछतावा नहीं है। हर चीज से मैंने सीखा है। जैसे, धनवंत से हमेशा ये सवाल पूछा जाता है कि घर पर सब ठीक है, लेकिन यही सवाल किसी मेल आॅफिसर से नहीं पूछा जाएगा, क्योंकि औरत के घर पर अगर सब ठीक नहीं होगा तो वह शायद केस ठीक से सॉल्व नहीं कर पाएगी। ऐसी सीनियर्स की सोच होती है तो खुद को साबित करना हर औरत की लड़ाई है, पर मुझे खुशी है कि हम सब ये लड़ाई लड़ रहे हैं।’

हीरो के बराबर हों फीमेल सेंट्रिक फिल्में
इधर, ओटीटी पर बॉलीवुड के कई पुराने स्टीरियोटाइप टूटे हैं। उन्हीं में से एक है, शेफाली शाह, मोना सिंह, सांक्षी तंवर जैसी उम्र का एक पड़ाव पार कर चुकीं दमदार एक्ट्रेसेस को मुख्य भूमिका में लेकर शो बनाना। क्या फिल्मों में भी यह बदलाव संभव है? इस पर मोना का कहना है, ‘असल में हमारा भारतीय सिनेमा इतना पुराना है कि हमारे पास इतने रेफरेंस और डेटा बेस है कि ये चलता है, ये नहीं चलता है। इसलिए, फिल्मों में एक सेट फॉर्मेट होता है। जैसे, वहां वुमन सेंट्रिक कहानियां ही बहुत कम हैं। साल में एक या दो फिल्में सेंट्रिक होती हैं। वे न चले तो बोल देते हैं कि ऐसी फिल्में चलती नहीं, मगर आप ज्यादा वुमन सेंट्रिक फिल्में बनाइए ना या कम से कम हीरो वाली फिल्मों के बराबर बनाइए। दोनों को बराबर मौके दीजिए, कैमरे के आगे और पीछे भी, तभी बदलाव आएगा। जबकि, ओटीटी हम सबके लिए बहुत नया है। यहां हम सबको मौका मिलता है एक्सप्लोर करने के लिए, प्रयोग करने के लिए तो मैं बहुत खुश हूं कि यह समय देख रही हूं, वरना तो ये संभव ही नहीं था।’

हमारा रिश्ता और मजबूत हुआ है
मोना सिंह हाल ही में आमिर खान के बैनर की फिल्म ‘हैपी पटेल’ में नजर आईं। इससे पहले उनकी ‘लाल सिंह चड्ढा’ में भी अहम भूमिका थी। आमिर खान के साथ अपने रिश्ते पर उन्होंने कहा, ‘3 इडियट्स में ‘आॅल इज वेल-आॅल इज वेल’ कहकर उन्होंने मेरी डिलिवरी करवा दी थी। ‘लाल सिंह चड्ढा’ में वो मेरे बेटे बन गए, मैं उनकी मम्मी बन गई। वहीं, ‘हैपी पटेल’ में वो मेरे पापा बन गए, तो हमारा रिश्ता सिर्फ मजबूत हुआ है। हमें एक दूसरे के लिए बहुत इज्जत है। मेरे लिए आमिर सर परिवार हैं। यह रिश्ता बहुत खास है। मैं इसे बहुत अहमियत देती हूं।’

मेरे किरादार के लिए तारीफ मिली
‘लाल सिंह चड्ढा’ आमिर खान के दिल के बहुत करीब थी। मोना का रोल भी उसमें काफी सराहा गया, मगर फिल्म नहीं चली। इस अनुभव पर मोना बताती हैं, ‘मैं तो उसी रात जाकर उनसे मिली थी। हम डायरेक्टर अद्वैत चंदन के साथ आमिर सर के घर गए थे। ये कभी सोचा नहीं था कि फिल्म रिलीज के बाद हम लोग ऐसे बैठे होंगे। हर कोई उदास था। किसी ने ज्यादा कुछ बात नहीं की, क्योंकि आप इतने दिल से एक फिल्म बनाते हैं, जिसमें इतना कुछ हो गया कि कोविड भी आया। लॉकडाउन हुआ। चीजें आगे पीछे हुईं पर उसमें दो चीजें पॉजिटिव हुईं। एक तो अभी हमारा बॉन्ड अलग है, क्योंकि साथ में सफलता देखना एक बात है, मगर जब आप असफलता साथ में देखते हैं ना, तो आपका रिश्ता और ज्यादा मजबूत हो जाता है। दूसरा, मुझे इस रोल के लिए इतना ज्यादा प्यार, इतनी तारीफ मिली कि मेरे लिए वो सफलता ही है।’

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