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प्रवासी कामगारों से घर जाने के लिए भाड़ा न नहीं लिया जाए : न्यायालय

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी के कारण पलायन कर रहे प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा का स्वत: संज्ञान लिए गए मामले में उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को निर्देश दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों से अपने गंतव्य जाने के इच्छुक श्रमिकों से रेल या बस का कोई किराया नहीं लिया जाएगा और उन्हें खाना और पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

शीर्ष अदालत ने विभिन्न स्थानों पर फंसे इन श्रमिकों के मामले में करीब ढाई घंटे की सुनवाई के बाद अंतरिम निर्देश दिए और कहा कि संबंधित राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश अपने यहां विभिन्न स्थानों पर फंसे कामगारों को भोजन उपलब्ध कराने के स्थान के बारे में उन्हें वहीं सूचित करेंगी जहां वह वे अपनी बारी के लिए ट्रेन या बस का इंतजार कर रहे हैं।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के बाद अपने निर्देशों में कहा कि इन श्रमिकों की यात्रा जिस राज्य से शुरू होगी, वे अपने यहां के स्टेशन पर भोजन और पानी उपलब्ध कराएंगे और यात्रा के दौरान इन श्रमिकों को भोजन तथा पानी रेलवे मुहैया कराएगा। न्यायालय ने कहा कि बसों में यात्रा के दौरान भी इन कामगारों को खाना और पानी उपलब्ध कराना होगा। इस मामले में न्यायालय अब पांच जून को आगे विचार करेगा।

पीठ ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे कामगारों के पंजीकरण की व्यवस्था देखें और यह सुनिश्चित करें कि ये कामगार अपने गंतव्य के लिए जल्द से जल्द ट्रेनों या बसों में सवार हों। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस संबंध में पूरी जानकारी सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिए प्रकाशित की जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि इस समय उसकी चिंता इन प्रवासी मजदूरों की तकलीफों और परेशानियों को लेकर है जो जल्द से जल्द अपने अपने पैतृक स्थानों पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

न्यायालय ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि संबंधित राज्य सरकारें और केन्द्र शासित प्रदेश आवश्यक कदम उठा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी कामगारों के यात्रा के पंजीकरण, उन्हें घर भेजने तथा उनके खाने-पीने के बंदोबस्त में अनेक कमियां पाई गई हैं। पीठ ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के इस कथन का भी संज्ञान लिया कि राज्य सरकारों को यह निर्देश दिए गए हैं कि सड़कों पर पैदल ही चल रहे कामगारों को बस या दूसरे वाहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पीठ ने कहा कि सड़कों पर पैदल ही जा रहा कोई भी कामगार दिखााई पड़ने पर उसे तत्काल आवास शिविर में पहुंचाया जाए और उसके लिए भोजन तथा दूसरी सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए।

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