लखनऊ। शहर के विकास को लेकर बड़ी-बड़ी योजनाएं बनती हैं मगर जिस प्लान के आधार पर इन्हें जमीन पर उतारा जाना है, अफसर वो प्लान बनाना ही भूल गए। किसी भी विकास प्राधिकरण क्षेत्र के विकास के लिए महायोजना बनती है। इस महायोजना के तहत विकास को जमीं पर उतारने के लिए जोनल प्लान बनाया जाना जरूरी होता है।
यूपी के विकास प्राधिकरणों में जोनल प्लान बनाया ही नहीं गया। प्राधिकरणों का विस्तार होता गया। गांव जुड़ते गये, लेकिन यहां विकास कैसे होगा, शायद इसके लिए अधिकारी प्लान बनाना ही भूल गए। उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम, 1973 के अनुसार महायोजना बनाए जाने के साथ साथ अथवा इसके लागू करने के बाद धारा-9 के अधीन जोनल डेवलपमेंट प्लान्स बनाना अनिवार्य है।
इसके बाद ही प्राधिकरण संबंधित क्षेत्र में विकास कार्य कर सकेगा। महायोजना-2031 को लागू तो कर दिया गया है। लेकिन जोनल प्लान न बनाने पर हाईकोर्ट को दखल देनी पड़ी। यही कारण कि जोनल डेवलपमेंट प्लान न होने से विस्तारित क्षेत्र के गांव प्राधिकरण में शामिल तो गए लेकिन यहां नक्शे नहीं पास हो पा रहे हैं। इससे यहां भवनों के मानचित्र को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। हाल यह है कि इन गांवों में प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर जिला पंचायत से मकान बनाकर बेचे जा रहे हैं।
अपार्टमेंट बनाकर फ्लैट बेचकर धोखाधड़ी की जा रही है। अब बिल्डरों के सामने समस्या है प्राधिकरण नक्शा पास नहीं करता है और पंचायत से पास कराने पर कार्रवाई की जाती है।





