लखनऊ। भगवान सूर्य की राशि परिवर्तन से प्रकृति में होने वाली क्रांति का पर्व है मकर संक्रांति। इस दिन भगवान सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण हो जाते हैं। सूर्य के उत्तरायण होते ही प्रकृति में परिवर्तन आरंभ हो जाता है। दिन बड़े होने लगते हैं और प्रकाश की अवधि बढ़ने लगती है। साथ ही शीत ऋतु का प्रकोप कम होना आरंभ हो जाता है। सनातन धर्म में पर्व-व्रत निर्धारण के लिए ऋषियों द्वारा प्रतिपादित व्यवस्था के अनुकूल सूर्य सिद्धांत आदि पारंपरिक गणित के आधार पर 14 जनवरी बुधवार की रात 9 बजकर 39 मिनट पर सूर्यदेव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति का पुण्यकाल संक्रांति के समय से 16 घंटे आगे तक रहता है। इस दृष्टि से पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा और दोपहर 01 बजकर 39 मिनट तक इसका पुण्यकाल होगा। 15 जनवरी की प्रात:काल सूर्योदय से दोपहर 01 बजकर 39 मिनट तक स्नान-दान का पर्व होगा। 14 जनवरी 2026 को रात में 9 बजकर 39 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में गोचर करेंगे। रात्रि के समय में संक्रांति हो रही है। इस वजह से मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को सूर्योदय के बाद से होगा। निर्णय सिंधु के अनुसार भी इस बार की मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी को प्राप्त हो रहा है क्योंकि सूर्य का प्रवेश मकर राशि में रात के समय हो रहा है। ऐसे में मकर संक्रांति 15 जनवरी गुरुवार को मनाना शास्त्र सम्मत है। मकर संक्रांति के दिन माघ कृष्ण द्वादशी तिथि है, उस दिन षट्तिला एकादशी का पारण है।
हालांकि कुछ पंचांग में मकर संक्रांति का समय 14 जनवरी को दोपहर में 03 बजकर 13 मिनट पर बताया गया है और उसका पुण्य काल 03:13 बजे से शाम 05:45 बजे तक है इस वजह से लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
मकर संक्रांति पर लोग गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। उसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं, गुड़, तिल, खिचड़ी, गरम कपड़े आदि का दान करते हैं। ऐसा करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस साल मकर संक्रांति के अवसर पर प्रयागराज में महाकुंभ का दूसरा अमृत स्नान भी होगा। उस दिन महाकुंभ मेले का दूसरा दिन होगा। मकर संक्रांति के दिन लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, दान आदि भी करते हैं। लोग मकर संक्रांति पर पितृ, देव और ऋषि ऋण से मुक्ति के लिए दान करते हैं। मकर संक्रांति को खिचड़ी और उत्तरायणी भी कहते हैं।
मकर संक्रांति पर एकादशी का संयोग
लखनऊ। जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। पौष कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर इस साल मकर संक्रांति पड़ रही है। इस बार मकर संक्रांति ऐसे शुभ संयोगों के साथ आ रही है, जिसमें दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस साल दो शुभ योग तो बन ही रहे हैं, साथ ही 23 साल के बाद संक्रांति पर एकादशी का शुभ संयोग देखने को मिलेगा। 14 जनवरी 2026 को धनु राशि से मकर राशि में सूर्य का प्रवेश दोपहर 3:07 बजे हो रहा है। इसी दिन मकर संक्रांति मनाई जाएगाी। इस दिन गंगा स्नान और दान पुण्य के लिए पुण्य काल देखा जाएगा। मकर संक्रान्ति के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति भी शुरू होती है। इस लिए इस पर्व को उत्तरायणी भी कहते हैं। मकर संक्रांति पर इस वर्ष 23 साल बाद एकादशी का शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन षट्तिला एकादशी व्रत भी है। संक्रांति और एकादशी का एक ही दिन में आना आध्यात्मिक रूप से अक्षय पुण्य फल देने वाला माना जाता है। पंडितों के मुताबिक, इससे पहले मकर संक्रांति और एकादशी का शुभ संयोग वर्ष 2003 में बना था।
एक फरवरी से शुरू होंगे वैवाहिक सहित समस्त मांगलिक कार्य
15 जनवरी को भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ खरमास समाप्त होगा, लेकिन 31 जनवरी तक शुक्र के अस्त होने की वजह से विवाह का शुभ समय एक फरवरी से शुरू होगा। शुक्र पश्चिम दिशा में उदय होंगे और फरवरी से मांगलिक कार्य पुन: सुचारू हो जाएगा। उन्होंने बताया कि मकर संक्रांति का पर्व अत्यधिक खास पर्व है। इस दिन विशेषकर दान पुण्य और नदी में स्नान करने का अधिक महत्व माना जाता है। पवित्र नदी में स्नान के बाद भगवान भास्कर को जल में लाल चंदन, लाल फूल, अक्षत मिलाकर अर्घ्य देने से आरोग्य, धन, सुख-समृद्धि और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं मकर संक्रांति को लेकर लोग तैयारी में जुट गए हैं। इस दौरान कई जगहों पर दही-चिउरा भोज व पतंग उत्सव का भी आयोजन किया जाएगा।
मकर संक्रांति पर दान करना होता है शुभ:
मकर संक्राति के पर्व को कहीं-कहीं उत्तरायण भी कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान, व्रत, कथा, दान और भगवान सूर्यदेव की उपासना करने का विशेष महत्त्व है। इस दिन किया गया दान अक्षय फलदायी होता है। शनि देव के लिए प्रकाश का दान करना भी बहुत शुभ होता है। पंजाब, यूपी, बिहार और तमिलनाडु में ये नई फसल काटने का समय होता है। इसलिए किसान इस दिन को आभार दिवस के रूप में भी मनाते हैं। इस दिन तिल और गुड़ की बनी मिठाई बांटी जाती है। इसके अलावा मकर संक्रांति पर कहीं-कहीं पतंग उड़ाने की भी परंपरा है।
मकर संक्रांति का महत्व :
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं. चूंकि शनि मकर व कुंभ राशि का स्वामी है, लिहाजा यह पर्व पिता-पुत्र के अनोखे मिलन से भी जुड़ा है। एक अन्य कथा के अनुसार, असुरों पर भगवान विष्णु की विजय के तौर पर भी मकर संक्रांति मनाई जाती है। बताया जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का संहार कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था. तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।
राजधानी में मकर संक्रान्ति पर खिलेंगे विविधता के फूल:
मिट्टी की हांडी में पारंपरिक बरसों पुराना खिचड़ी का स्वाद, स्नान संग दान, घेवर की महक और जलेबी का स्वाद तो कहीं पकौडियों की महक तो केले के पत्ते पर बिखरते परंपरिक त्यौहार के स्वाद…साल भर अलग-अलग समुदायों के पर्वों से रंगी रहने वाली राजधानी में आज मकर संक्रान्ति के अवसर पर विविधता के रंग देखने को मिलेंगे। आज जहां युवा और बच्चों में पतंगबाजी और पेच लड़ाए जाएंगे तो वहीं पुरानी रीति से बुजुर्ग पूजापाठ करते नजर आएंगे।
पकवानों का उठाते हैं लुत्फ :
मकर संक्रान्ति का पर्व सिंधी समाज में तरमूरी के नाम से जाना जाता है। सिंधी समाज के लोग संक्रान्ति की पूर्व संध्या पर सामूहिक रूप से रात में अलाव जलाकर माता लाललोई की पूजा करते हैं। तिल के लड्डू, तिल की पट्टी, मीठे चावल, पालक का साग, मिठाई जैसे पकवानों का लुत्फ उठाते हैं पर सबसे पहले इस भोग को गाय को अर्पित कर फिर कन्या को भोग लगाते हैं।
आटे और गुड़ की बनती है मीठ्ठी कतली:
पर्वतीय समाज इस त्यौहार को कुमाऊनी समाज में घुघुतिया कहते हैं। मकर संक्रति के दिन बनने वाले भोजन को घुघुती कहते हैं। सूरज निकलने पर स्नान कर सबसे पहले मंदिरों में जाकर माथा झुकाते हैं। सर्वाधिक लोग बाग मंदिरों में बाबा भोलेनाथ को जल चढ़ाकर पूजा को संपन्न करते हैं। उन्होने बताया कि इस दिन हमारे समाज के बच्चे पकवानों को सुबह सवेरे ही ऊंचे स्थान पर रख देते हैं और कौओं को खाना खिलाया जाता है। इस दिन घर की महिलाएं आटे और गुड़ की मीठ्ठी कतली बनाती हैं, जिसको घुघुरी कहते हैं इसके संग मालपुआ और बरा भी बनाया जाता है।
चिउरा-गुड़ व तिल के लड्डू की खूब हुई बिक्री
लखनऊ। मकर संक्रांति खिचड़ी पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इसके मद्देनजर चिउरा, लाई, तिलकूट की दुकानों से बाजार पट गया है। शहर के बाजारों में लोगों ने चिउरा, गुड़ समेत अन्य सामग्रियों की जमकर खरीदारी हुई। बाजारों में इस बार पर्व के मद्देनजर रंग-बिरंगे पतंग की दुकानें भी सजी हैं। खिचड़ी का पर्व पूरे देश के साथ ही जिले में भी धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग सुबह गंगा स्नान के बाद दिन में आम तौर पर दही, चिउरा व शाम में खिचड़ी खाने की परम्परा है। इसके निमित लोग एक दिन पहले से ही बाजारों में चिउरा, गुड़, तिल का लड्डू व तिलकूट आदि का प्रयोग खाने में करते हैं। इसे देखते हुए सोमवार को बाजार में काफी रौनक रही। दुकानदार भी बाजार में आयी तेजी से खुश नजर आये।
तिल, मूंगफली, काजू के बने आइटमों की डिमांड:
मकर संक्रांति को लेकर शहर के बाजार सज उठे हैं। तिल, मूंगफली, रामदाना, काजू, किसमिस से बने आइटमों की डिमांड बढ़ गई है। तिल के लड्डू और गजक पसंद पर हावी हैं। शहर के जगह-जगह दुकानें सज गई हैं। तिल की गजक अबकी 240 रुपए किलो से 350 रुपए किलो तक बिक रही है, जबकि तिल बर्फी, लड्डू के दाम अलग-अलग है। मूंगफली, काजूदाना के आइटम भी बाजारों में मौजूद हैं।
रंग-बिरंगी पतंगों की दुकानों पर उमड़ी भीड़:
मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इसके चलते बाजारों में सामानों की दुकानें जहां सजी गई हैं। वहीं, दुकानों पर रंग बिरंगी पतंग भी सज गए। कार्टून, फिल्मी कलाकारों व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी के चित्र वाले पतंगों की अधिक डिमांड देखी जा रही है। पतंगबाजी को लेकर बच्चों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। मकर संक्राति के मौके पर पतंग उड़ाने कि परम्परा सदियों से चली आ रही है। त्योहार के एक पखवारे पूर्व से लेकर 15 दिन बाद तक त्योहार का खुमार सिर चढ़कर बोलता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर्व के दिन से साल के अच्छे दिनों कि शुरूआत होती है। इस दिन गंगा स्नान कर पूजा, पाठ तथा गुड़ मीठे पकवान बनाने कि परम्परा है। इसके साथ ही त्योहार पर बच्चों के साथ जवान तथा बड़े बूढ़े भी साथ देते हैं। ऐसे में बाजारों में रंग बिरंगी पतंग की दुकानें सज गई हैं। जहां पर खरीददारों की संख्या देखी जा रही है।
सीएम योगी का क्रेज, बुलडोजर बाबा पतंग की बढ़ी डिमांड:
मकर संक्रांति का दिन धार्मिक महत्व के साथ पतंगबाजों के लिए भी खास होता है। लखनऊ में इस दिन आसमानों में रंग-बिरंगे पतंग दिखते है। इस बार रंग-बिरंगे पतंगों के बीच एक खास पतंग भी लखनऊ के आसमानों में देखने को मिल रहा है। राजधानी के बाजारों में इस बार बुलडोजर बाबा वाली पतंग की खासी डिमांड है। बाजार में ये पतंग छाए हुए हैं। बुलडोजर बाबा वाली इस पतंग पर सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर बनी है, इसके अलावा बुलडोजर को भी जगह मिली है। इतना ही नहीं इस पतंग पर भारतीय जनता पार्टी का चुनाव चिन्ह कमल भी छपा है। दुकानदार अरविंद ने बताया कि रंग बिरंगे पतंगों के बीच बुलडोजर बाबा पतंग युवाओं को पंसद आ रहा है।





