राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान की ओर से सरस काव्य समारोह का आयोजन
लखनऊ। राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान, उ.प्र. द्वारा संस्थान कार्यालय में अपराह्न विश्व हिन्दी दिवस, बसंत पंचमी एवं गणतन्त्र दिवस के उपलक्ष्य में एक सरस काव्य समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता संस्थान की उपाध्यक्ष डॉ. शोभा दीक्षित भावना ने की। काव्य समारोह में विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार रामराज भारती रहे। माँ वाणी की वन्दना अखिलेश त्रिवेदी शाश्वत ने की। काव्य समारोह का सफल व कुशल संचालन संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. उमेश आदित्य ने किया। संयोजन संस्थान की महामंत्री डॉ.सीमा गुप्ता ने किया।
काव्य समारोह में राजश्री दुबे, ऋतु, पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव, डॉ. राधा बिष्ट, मीना गौतम, डॉ. सुधा मिश्रा, अलका शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा,रामराज भारती, जयेन्द्र चतुवेर्दी, रामगुलाम, विपुल कुमार मिश्र, आदित्य तिवारी, डॉक्टर उमेश आदित्य, अखिलेश त्रिवेदी शाश्वत ,डॉ. हरी प्रकाश हरि, राम सेवक द्विवेदी एवं सुरेन्द्र गौतम ने अपनी सरस वाणी से सुन्दर रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के पश्चात उपस्थित साहित्यकारों का आभार ज्ञापन सुरेन्द्र शर्मा द्वारा किया गया। सभी कवियों की रचनाओं को उपस्थित श्रोताओं द्वारा भूरि-भूरि सराहा गया।
संक्षिप्त में काव्यपाठ के प्रुमुख अंश निम्नलिखित हैं जिनमें डॉ. शोभा दीक्षित भावना करें प्रमुदित हृदय से आइये आभार हिन्दी का, हमारे कर्म से प्रकटे सदा, सत्कार हिन्दी का। डॉ. उमेश आदित्य रक्त के समान तन में प्रवाहमान यह, हिन्दी मातृभाषा हमें जान से भी प्यारी है। डॉ. हरी प्रकाश हरि भारत माता के माथे की बिन्दी मात्र नहीं हिन्दी, है सोलहों शृंगार सजीला हिन्दी मात्र नहीं बिन्दी। राजश्री दुबे माधव तुम मेरे हृदय कुंज में। पूर्णिमा बेदार श्रीवास्तव भवन भाषा का हो जिस पर वो सरस आधार है हिन्दी। डॉ. राधा बिष्ट आवा बसंत ऋतु सर्दी का अंत सखि, खेतवा लहर, लहराय मोरी सजनी। डॉ. सुधा मिश्रा – नाम करता हुआ अपना ये मुकद्दर होगा, हमें मालूम है कल आज से बेहतर होगा। सुरेन्द्र शर्मा लड़ते लड़ते दुश्मन को मिटा जायेंगे, रक्त की बूँद-बूँद वतन पर लुटा जायेंगे। रामराज भारती सारा काम करें हिंदी में,पालन में अमराई है। जयेन्द्र नाथ चतुवेर्दी खेतों में लहराई हरियाली, पीली चुनरिया ओढ़े धरा। विपुल कुमार मिश्र खुसरो की वानी में हूँ रासो की कहानी में हूँ, सिद्धनाथ पंथ का प्रसार करती हूँ मैं।





