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कस्तूरी फेस्टिवल ने संगीत, ध्यान और करुणा की एक आत्मिक अनुभूति रची

कस्तूरी फेस्टिवल 3.0 अनहद नाद : दिव्य निनाद का आयोजन
लखनऊ। लखनऊ स्थित संगीत नाटक अकादमी का शांत वातावरण शनिवार संध्या उस समय गहन आत्मचिंतन और आध्यात्मिक शांति से भर उठा, जब कस्तूरी फेस्टिवल 3.0 अनहद नाद : दिव्य निनाद का आयोजन किया गया। एहसास द्वारा आयोजित इस संगीत महोत्सव ने संगीत, सजगता (माइंडफुलनेस) और मानवीय मूल्यों को एक दुर्लभ एवं भावनात्मक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया। वर्ष 2002 से कार्यरत, एहसास एक राष्ट्रीय पुरस्कार-प्राप्त संस्था है, जो समाज के वंचित वर्गों की सेवा के लिए निरंतर प्रयासरत है। कस्तूरी फेस्टिवल करुणा और सद्भावना का उत्सव है, जो प्रेम, सहानुभूति, सेवा, सत्य और आत्म-जागरूकता जैसे मूल्यों को केंद्र में रखता है। मनोरंजन से परे आत्मचिंतन के उद्देश्य से रचित यह आयोजन, हर वर्ष फरवरी में आयोजित होने वाले कम्पैशन इन एक्शन माह-व्यापी उत्सव की भूमिका भी प्रस्तुत करता है, जिसके अंतर्गत एहसास द्वारा विभिन्न कार्यशालाएँ और सामुदायिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।
कार्यक्रम की शुरूआत धनंजय एवं नितीश की भावपूर्ण युगल गायन प्रस्तुति से हुई, जिसने श्रोताओं को ध्यान और आत्मिक शांति की अवस्था में प्रवेश कराया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को अपनी सांसों और अंतर्मन से जुड़ने का अवसर दिया। इसके पश्चात ऋषिराज कुलकर्णी ने मल्टी-परकशन एवं हैंडपैन के माध्यम से लय और मौन का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं को सजगता और सामूहिक अनुभूति की गहराई में ले जाने का कार्य किया। कार्यक्रम का समापन ग्रैमी-नामांकित बांसुरी वादक अजय प्रसन्ना की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुति से हुआ। उनकी बांसुरी की स्वर लहरियों ने सभागार को मौन, स्थिरता और दिव्य अनुभूति से भर दिया, जिससे यह संध्या एक स्मरणीय आत्मिक अनुभव बन गई। परंपरागत संगीत महोत्सवों से भिन्न, कस्तूरी फेस्टिवल 3.0 ने संगीत को ध्यान के रूप में अनुभव करने का निमंत्रण दिया। श्रोताओं की निरंतर सहभागिता इस बात का प्रमाण रही कि यह अनुभव शांति, संतुलन और आत्मिक उन्नयन से परिपूर्ण था। आयोजकों के अनुसार, कस्तूरी जीवन की आपाधापी से विराम लेकर ध्वनि, मौन और साझा मानवीय मूल्यों के माध्यम से स्वयं से जुड़ने का आमंत्रण है। शास्त्रीय संगीत, ध्यान और सामाजिक उद्देश्य के अनूठे संगम के साथ कस्तूरी म्यूजिक फेस्टिवल लखनऊ में एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहल के रूप में अपनी पहचान सुदृढ़ करता जा रहा है, जो एहसास के करुणा-आधारित सामाजिक मिशन को मजबूती प्रदान करता है।

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