लखनऊ। सनातन धर्म में कालाष्टमी पर्व का खास महत्व है। यह पर्व हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर काल भैरव देव की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही काल भैरव देव के निमित्त व्रत रखा जाता है। धार्मिक मत है कि काल भैरव देव की पूजा करने से सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। साथ ही विशेष कामों में सफलता मिलती है। काल भैरव देव बुरी नजरों से भी साधक और उनके परिवार की रक्षा करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 09 अप्रैल को रात 09 बजकर 19 मिनट पर शुरू होगी और 10 अप्रैल को रात 11 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। कालाष्टमी पर निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। इसके लिए 09 अप्रैल को वैशाख माह की कालाष्टमी मनाई जाएगी। ज्योतिषियों की मानें तो वैशाख माह की कालाष्टमी पर दुर्लभ शिव और परिघ योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही निशाकाल में शिववास योग का भी संयोग है। इस योग में भगवान शिव कैलाश पर जगत जननी मां पार्वती के साथ रहेंगे। शिववास योग में काल भैरव देव की पूजा करने से साधक को अक्षय फल मिलेगा। साथ ही सभी अटके काम पूरे होंगे। इसके साथ ही कालाष्टमी पर भद्रावास योग का भी संयोग है।
कालाष्टमी धार्मिक महत्व
इस दिन जो भी व्यक्ति पूरे दिन व्रत रखकर काल भैरव की पूजा- अर्चना करता है। उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। साथ ही काल भैरव की पूजा करने से महादेव प्रसन्न होते हैं। साथ ही अज्ञात भय खत्म होता है और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। कालभैरव की उपासना से रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन के सभी संकट दूर होते हैं। इस दिन भगवान शिव के उग्र स्वरूप कालभैरव की उपासना की जाती है, जिन्हें समय, अनुशासन और न्याय का अधिपति माना गया है. मान्यता है कि कालभैरव की आराधना से व्यक्ति के मन में व्याप्त भय दूर होता है और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त होता है।
कालाष्टमी की पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन पूजा की शुरूआत प्रात:काल स्नान और शुद्ध वस्त्र धारण करने से होती है। स्नान के बाद अपने घर के पूजा स्थल को साफ करें। वहां दीप प्रज्वलित करें. यदि संभव हो तो नजदीकी मंदिर जाकर भी भगवान कालभैरव की आराधना की जा सकती है। पूजा के दौरान भगवान कालभैरव का ध्यान करते हुए रुद्राक्ष की माला से ॐ कालभैरवाय नम: मंत्र का जाप करें। इस दिन धूप, दीप, पुष्प और फल अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन उपवास रखना अत्यंत फलदायी होता है और रात्रि जागरण का भी महत्व है, क्योंकि निशिता काल में भगवान की कृपा अधिक प्रभावशाली होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान कालभैरव का वाहन कुत्ता है, इसलिए कालाष्टमी के दिन काले कुत्ते को भोजन कराना शुभ माना जाता है। इस दिन भैरव को विशेष भोग अर्पित करने की परंपरा भी है. श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा नकारात्मक प्रभाव कम करती है और जीवन में मानसिक शांति, सुरक्षा, आत्मविश्वास व सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है।





