दुबई। ईरान के सर्वाेच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की इजराइल और अमेरिका द्वारा किए गए एक बड़े हमले में मौत हो गयी है। ईरान की सरकारी मीडिया ने रविवार तड़के इसकी पुष्टि की। इस घटना ने ईरान के भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है और क्षेत्रीय अस्थिरता का खतरा बढ़ा दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ घंटे पहले खामेनेई की मौत की घोषणा करते हुए कहा कि इससे ईरानियों को अपने देश की बागडोर अपने हाथों में वापस लेने का सबसे बड़ा मौका मिला है। सरकारी मीडिया ने बताया कि 86 वर्षीय खामेनेई की तेहरान के मध्य क्षेत्र में उनके परिसर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में मौत हुई।
यूरोपीय एयरोस्पेस कंपनी एयरबस द्वारा ली गयी सैटेलाइट तस्वीरों में वह स्थान भारी बमबारी से क्षतिग्रस्त दिखायी दिया, जहां खामेनेई की मौत हुई है। सरकारी मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार, अमेरिकी-इजराइली हमलों में ईरान के अर्द्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड के प्रमुख और एक शीर्ष सुरक्षा सलाहकार की भी मौत हो गयी है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने मेजर जनरल मोहम्मद पकपोर की मौत की घोषणा की, जिन्होंने पिछले साल जून में 12 दिन के युद्ध के दौरान इजराइल द्वारा गार्ड के पूर्व कमांडर की हत्या के बाद इस बल के शीर्ष कमांडर का पद संभाला था।
ईआरएनए के अनुसार, अली शमखानी भी हमले में मारे गए। वह लंबे समय से ईरान के सुरक्षा तंत्र में एक प्रमुख और प्रभावशाली व्यक्ति रहे थे। सरकारी टीवी ने बताया कि खामेनेई के कार्यालय में हुई उनकी मौत यह दिखाती है कि वह लगातार जनता के बीच खड़े रहे और अपनी जिम्मेदारियां निभाने में आगे रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, इतिहास के सबसे दुष्ट लोगों में से एक खामेनेई मारा जा चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि भारी और सटीक बमबारी जारी रहेगी, जो पूरे सप्ताह तथा उससे आगे तक चल सकती है।

अमेरिका ने इस घातक हमले को यह कहते हुए उचित ठहराया कि यह ईरान की परमाणु क्षमताओं को निष्क्रिय करने के लिए आवश्यक है। हमलों के बाद जवाबी कार्वाई शुरू करने वाले ईरान ने बदला लेने की चेतावनी दी है। ईरान के मंत्रिमंडल ने कहा कि इस घोर अपराध का जवाब जरूर दिया जाएगा। रिवोल्यूशनरी गार्ड ने खामेनेई की हत्या के बाद अब तक का अपना सबसे भीषण आक्रामक अभियान शुरू करने की रविवार को धमकी दी। यह हमला ईरान में अमेरिकी हस्तक्षेप के एक नए और चौंकाने वाले अध्याय की शुरूआत है।
इससे बदले की हिंसा और व्यापक युद्ध का खतरा बढ़ गया है और यह उस अमेरिकी राष्ट्रपति की सैन्य शक्ति का बड़ा प्रदर्शन भी है, जो अमेरिका प्रथम के नारे के साथ सत्ता में आए और अनवरत युद्धों से दूर रहने का वादा किया। ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में पिछले आठ महीनों में ईरान पर हुए दूसरे हमले में खामेनेई की हत्या से नेतृत्व का बड़ा शून्य पैदा होना लगभग तय है, क्योंकि उनका कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है। खामेनेई के पास दशकों तक सत्ता में रहते हुए सभी प्रमुख नीतियों पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार था। वह ईरान के धार्मिक प्रतिष्ठान और अर्द्धसैनिक बल रिवोल्यूशनरी गार्ड का नेतृत्व करते थे, जो देश की सत्ता के दो प्रमुख केंद्र हैं। उनकी मौत की खबरें आने पर तेहरान में कुछ लोगों ने खुशी मनाई।
तेहरान में प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ निवासी छतों से नारे लगा रहे थे, सीटी बजा रहे थे और खुशी व्यक्त कर रहे थे। इस बीच, खामेनेई की मौत से शोकाकुल लोगों ने इमाम रजा दरगाह पर काला झंडा फहरा दिया। यह स्थान ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद में स्थित है और शिया मुसलमानों के लिए एक प्रमुख तीर्थस्थल है। ईरानी सरकार ने खामेनेई की मौत के बाद 40 दिनों के सार्वजनिक शोक और सात दिनों के राष्ट्रव्यापी सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की। अज्ञात सूत्रों के हवाले से अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने बताया कि खामेनेई के कई रिश्तेदार भी इस हमले में मारे गए, जिनमें उनकी एक बेटी, दामाद, बहू और एक पोताापोती शामिल हैं।

अमेरिका और इजराइल का यह संयुक्त अभियान मुस्लिमों के पवित्र महीने रमजान के दौरान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह अभियान कई महीनों से योजना बनाकर शुरू किया गया। इजराइल ने दावा किया कि उसने रिवोल्यूशनरी गार्ड के कमांडर, ईरान के रक्षा मंत्री और ईरानी सुरक्षा परिषद के सचिव को भी मार दिया है, जो खामेनेई के करीबी सलाहकार थे।
ट्रंप ने कहा, खामेनेई हमारी खुफिया और अत्याधुनिक निगरानी प्रणालियों से बच नहीं पाए। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त कार्वाई के चलते उनके पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। उन्होंने कहा कि यह ईरानी लोगों के लिए अपने देश की बागडोर अपने हाथों में वापस लेने का सबसे बड़ा मौका है।इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक ईरानी राजनयिक ने कहा कि हमलों में सैकड़ों नागरिक मारे गए और कई घायल हुए। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे और रात तक हमले जारी रहे





