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भारत अपनी जैव विविधता के लिए विश्व विख्यात : आनंदीबेन पटेल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को कहा कि जैव विविधता से हमारी पारिस्थितिकीय तंत्र का निर्माण होता है, जो एक-दूसरे के जीवन यापन में सहायक होते हैं। जैव विविधता पृथ्वी पर पाई जाने वाली जीवों की विभिन्न प्रजातियों को कहा जाता है। भारत अपनी जैव विविधता के लिए विश्व विख्यात है। उन्होंने कहा कि भारत 17 उच्चकोटि के जैव विविधता वाले देशों में से एक है और पूरी दुनिया की जैव विविधता में भारत की 7 प्रतिशत भागीदारी है।

राजभवन से अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर लखनऊ विश्वविद्यालय और जैव विविधता बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ई-संगोष्ठी ‘हमारा समाधान प्रकृृति में हैं’ का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति देशवासियों को विभिन्न प्रकार के मौसम प्रदान करती है। भारत में 17 कृषि जलवायु जोन हैं, जिनसे अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थ प्राप्त होते हैं।

देश के जंगलों में विभिन्न प्रकार के नभचर, थलचर एवं उभयचर प्रवास करते हैं। इनमें रहने वाले पक्षी, कीट एवं जीव जैव विविधता को बढ़ाने में सहायक होते हैं। प्रकृति मनुष्य और जीव जन्तुओं के जीवन के प्रारम्भ से अंत तक के लिये खाने-पीने, रहने आदि सभी की व्यवस्था उपलब्ध कराती है। मनुष्य खेती कर भूमि से अपने भोजन हेतु अन्न एवं सब्जियां उगाता है और अस्वस्थ होने पर प्रकृति द्वारा दी गयी औषधियों से उपचार करता है।

आनंदीबेन पटेल ने कहा कि हमारा देश वैदिक काल से ही अपनी औषधीय विविधता के लिए प्रसिद्ध रहा है। अथर्ववेद में औषधीय पौधे एवं उनके प्रयोग का उल्लेख मिलता है। इसी तरह रामायण में भी बरगद, पीपल, अशोक, बेल एवं आंवले का उल्लेख मिलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोविड-19 से बचाव हेतु क्लोरोक्विन दवा का प्रयोग कई देशों द्वारा किया जा रहा है।

इसका सबसे ज्यादा उत्पादन एवं निर्यात भारत द्वारा पूरे विश्व में किया जा रहा है। इस दवा का प्रयोग मलेरिया बीमारी के लिए होता है। यह चिनकोना पेड़ से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि हम सबको मिलकर जैव विविधता के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए और अधिक से अधिक वन, बगीचे, औषधीय पौधे एवं वृक्षों को लगाना चाहिए। इससे हमारे आस-पास के जैव विविधता में बढ़ोत्तरी होगी और पर्यावरण की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

इसके पहले राज्यपाल ने राजभवन से ही लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में महिला सामुदायिक प्रसाधन केन्द्र का ई-शिलान्यास किया और लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित न्यूजलेटर (द कोरस) और लखनऊ शहर के जैव विविधता सूचकांक (इण्डेक्स) का लोकार्पण भी किया।

इस मौके पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आलोक कुमार राय सहित आबूधाबी, इस्रराइल, साउथ अफ्रीका, यूएसए, फ्रांस, जापान और ब्राजील जैसे 8 देशों के विषय विशेषज्ञ भी ऑनलाइन उपस्थित थे।

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