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दरक रहा इंडिया गठबंधन, आपस में भिड़े कांग्रेस-सपा के नेता

शैलेन्द्र श्रीवास्तव लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी की केंद्र और राज्य सरकारों को शिकस्त देने के लिए विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाते हुए इंडिया गठबंधन बनाया लेकिन यह गठबंधन मात्र उत्तर प्रदेश के मऊ सीट पर हुए घोसी उपचुनाव तक ही दिखा।

इसके बाद अब मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव के लिए हुए सीट वितरण में जब समाजवादी पार्टी को एक भी सीट न मिलने से अखिलेश यादव का गुस्सा फूटा और उन्होंने कांग्रेस नेताओं को लेकर तल्खी ही जाहिर नहीं की बल्कि उन पर जमकर हमला भी बोला। वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी अखिलेश को घेरने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ऐसे में माना जा रहा है कि इंडिया गठबंधन में दरार पड़ गयी है और आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक फेरबदल हो सकता है।

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर अब इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवारों की पहली सूची में 144 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किये थे। वहीं, दूसरी सूची में कांग्रेस ने 88 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। दोनों सूची में गठबंधन के घटक दल सपा के लिए सीटें नहीं छोड़ी।

अब कांग्रेस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव आक्रोशित हो गये है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर हुई बैठक के बाद भी कांग्रेस ने सपा को एक भी सीट नहीं दी, जिसके बाद अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव में खुलकर समर्थन नहीं देने की बात कही है। अखिलेश ने कहा कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में सपा के साथ जो व्यवहार किया, वैसा हीं व्यवहार सपा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के साथ करेगी।

दरअसल कांग्रेस के साथ सपा नेताओं की मध्य प्रदेश में छह सीटों को लेकर बैठक में तय किया गया था, जिसमें सीट पर दावे का आधार भी स्पष्ट तौर पर बताया गया था लेकिन कांग्रेस ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। बैठक में जिन छह सीटों पर चर्चा की गयी थी उन सीटों पर पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में सपा उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी।

वहीं कांग्रेस की पहली सूची आने से पहले सपा ने सात उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी, लेकिन कांग्रेस की सूची में सभी सीटों पर उम्मीदवार घोषित होने के बाद 22 नये उम्मीवारों के नामों की घोषणा कर दिया। इसमें कांग्रेस से टिकट काटे गए उम्मीदवारों के नाम भी शामिल है।

कांग्रेस द्वारा सभी सीटों पर उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करने के बाद अखिलेश ने कहा कि यदि उन्हें पता होता कि कांग्रेस धोखा देगी तो वह न तो सपा नेताओं को मध्य प्रदेश में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचाते, न ही उनसे प्रत्याशियों के नाम की चर्चा करते और न ही कांग्रेसी नेताओं के फोन उठाते।

कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर हुई बैठक के बाद भी सपा को एक भी सीट चुनाव के लिए नहीं दिये जाने के बाद से सपा प्रमुख लगातार कांग्रेस पर हमलावर है। अखिलेश की बयानबाजी के बाद कांग्रेस नेता कमलनाथ और उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश के बयान पर पलटवार भी किया।

सत्ता के गलियारों में पुरानी यादें हुई ताजा

इन्हीं सबके बीच राजनीतिक गलियारे में सपा-कांग्रेस के बीच हुआ एक पुराना किस्सा फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल वर्ष 2017 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव सपा और कांग्रेस ने साथ मिलकर लड़ा था। हालांकि यह गठबंधन किसी काम नहीं आ सका और मोदी लहर में सपा विधानसभा चुनाव में 224 से सीधे 47 पर पहुंच गयी थी। वहीं कांग्रेस भी 28 से 7 पर आ गयी थी।

वहीं मुख्यमंत्री बनने पर योगी आदित्यनाथ की लोकसभा सीट गोरखपुर और डिप्टी सीएम बने केशव प्रसाद मौर्य की लोकसभा सीट फूलपुर से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद वर्ष 2018 में इन सीटों पर साथ चुनाव लड़ने के लिए अखिलेश ने राहुल गांधी को फोन किया, लेकिन राहुल ने उनका फोन नहीं उठाया और न ही पलट कर कॉल किया। दोनों सीटों पर सपा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे थे हालांकि परिणाम सपा के पक्ष में आये और सपा के दोनों प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी।

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