वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। यदि अक्सर पेट में दर्द, मरोड़, गैस और सूजन डायरिया या कब्ज की समस्या हो। अचानक वजन का कम या बढ़ जाये और पीरियड्स न होने पर भी ब्लीडिंग हो तो इसे नजरअंदाज न करें। यह ओवरी कैंसर के लक्षण हो सकते हैं। समय रहते जांच व इलाज न कराने पर यह जानलेवा हो सकता है।
यह जानकारी केजीएमयू के पूर्व कुलपति व रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एमएलबी भट्ट ने दी। वह गुरुवार को केजीएमयू रेडियोथेरेपी विभाग की तरफ से ओवरी कैंसर पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में ओवरी कैंसर के बारे में तब पता चलता है जब वह काफी आगे बढ़ चुका होता है। यदि कैंसर का शुरूआती तौर पर पता चल जाएं तो इसका इलाज संभव है। ओवरी कैंसर होने के कई कारण हैं।
इन्फर्टिलिटी का लंबा उपचार, आनुवांशिकता, पहले ब्रेस्ट या कोलोन कैंसर होना, बच्चा न होना आदि इसके कारण हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि महिलाओं में ओवरी का कैंसर बहुत ही आम है। 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका खतरा बढ़ जाता है। इस मौके पर चक गंजरिया स्थित कल्याण सिंह कैंसर संस्थान में रेडियोथेरेपी विभाग के अध्यक्ष डॉ. शरद सिंह ने कहा कि जेनेटिक्स व मॉलीक्यूलर जांच ने इलाज को नई दिशा दी है।
जेनेटिक्स जांच के आधार पर सटीक दवा तय की जा सकती है। यह जांच बायोप्सी से होती है। यदि मरीज के पेट में पानी आ गया है तो उससे भी जांच मुमकिन है। लोहिया संस्थान में मेडिकल आंकोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने पैनल डिस्कशन में कहा कि ओवरी के कैंसर में महिलाओं को रक्तस्राव होता है। पेट भरा महसूस होता है। बार-बार पेशाब महसूस होता है। ऐसे लक्षण नजर आने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
केजीएमयू रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि नई दवाओं से ओवरी के कैंसर का इलाज बेहतर हुआ है। हालांकि इस बीमारी के दोबारा होने की आशंका अधिक रहती है, लिहाजा सावधानी बरतें। पौष्टिक खान-पान लें। डॉ. कमलेश वर्मा, डॉ. सत्य सारंगी, केजीएमयू सर्जिकल अंकोलॉजी विभाग के डॉ. विजय कुमार, डॉ. नसीम अख्तर ने भी जानकारी दी।





