तस्वीर पर फूल-माला अर्पित कर उन्हें याद किया गया
लखनऊ। नमोस्तुते मॉं गोमती के तत्वावधान मेंं हर माह की प्रत्येक माह में होने वाली मां गोमती की आरती के क्रम में आज शनिवार को पौष माह की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को मॉं गोमती की आरती की गई। डालीगंज,गोमती के तट पर स्थित प्राचीन शिवालय श्रीमनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्यागिरि जी महाराज की अगुवाई में उपवन घाट पर 11 वेदियों से आरती की गई । इस अवसर पर मॉ गोमती की सफाई की गई और साथ ही मॉ शाकम्बरी देवी की पूजा हुई और शिक्षक, समाज सुधारक श्रीमती सावित्री बाई फूले की जयंती भी मनाई गई। उनकी तस्वीर पर फूल-माला अर्पित कर उन्हें याद किया गया।
सबसे पहले पौष की ठंड सुबह मंदिर के सेवादारों और स्वयं सेवकों ने गोमती की सफाई की। गोमती से जलकुंभी और कच़ड़ा निकाला। उसके बाद दोपहर को डालीगंज गोमती तट पर बने उपवन घाट पर रंगोली सजाई। मंदिर की प्रमुख सेवादार उपमा पांडेय के साथ कमलेश यादव, रीना, मधु, रेनू,किरण वर्मा, प्रीति, सुधा, अंजू वर्मा, रेशमा, लज्जावती, ममता, दीपा सोनकर, पूजा यादव, सुमन तिवारी, निर्मला पाठक, सुषमा, सुनीता, गीता जायसवाल, निर्मला मिश्रा ने घाट की सफाई कर रंगोली सजाई।
आरती से पहले साध्वी गौरजा गिरि जी ने मंत्रोच्चारण कर पूजा करवाई। उसके बाद शंख और घंटों के साथ मॉ गोमती की आरती की गई। आरती के समय तट का वातावरण भक्तिमय हो गया।
इस अवसर पर श्रीमहंत ने श्रीमती सावित्री फूले को स्मरण करते हुए बताया कि उनका जन्म 3 जनवरी, 1831 को हुआ था। आधुनिक भारत की प्रथम शिक्षिका के तौर पर जाना जाता है। वह देश के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिसिंपल थी। उन्होंने महिलाओं की शिक्षा, विधवा विवाह, दीन-दुखियो की सेवा, अनाथों की सेवा के लिए जाना जाता है। छुआ-छूत को मिटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गोमती को स्वच्छ रखने अपना योगदान दे, यह सबकी माता है। जल नहीं तो कुछ नही।





