दहन वातावरण को शुद्ध करता है
लखनऊ। राजधानी लखनऊ की सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु एवं श्री मनकामेश्वर मठ मंदिर की महंत देव्या गिरि जी के नेतृत्व में इस वर्ष ‘पर्यावरण संरक्षण’ और ‘सनातन गौरव’ के अद्भुत संगम के साथ होली का पर्व मनाया जा रहा है। मंदिर प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस वर्ष होली के अवसर पर प्रकृति की रक्षा का बड़ा संकल्प लेते हुए मंदिर के सम्मुख लकड़ी के स्थान पर गाय के गोबर से बने कंडों (गोमय) से भव्य होलिका और मूर्ति का निर्माण किया गया है।
आज शाम 5:00 बजे से स्वयं महंत देव्या गिरि जी मंदिर के सम्मुख स्थापित गोमय होलिका और दिव्य मूर्ति का विधि-विधान से पूजन एवं आरती संपन्न करेंगी। इसके उपरांत, आदि गंगा माँ गोमती के तट पर महंत जी के नेतृत्व में ‘गमा गोमती आरती’ का भव्य आयोजन होगा, जिसमें सैकड़ों दीपों के माध्यम से माँ गोमती के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाएगी। इस अवसर पर महंत देव्या गिरि जी ने समस्त जनमानस को ‘इको-फ्रेंडली’ और ‘संस्कारयुक्त’ होली मनाने का संदेश देते हुए इसके लाभ बताए हैं महंत जी के अनुसार, गाय के गोबर से बने कंडों (गोमय) का दहन वातावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक कीटाणुओं का नाश करता है। यह वायु को विषाक्त होने से बचाता है, जो लकड़ी के दहन की तुलना में कहीं अधिक श्रेष्ठ है। महंत जी ने भक्तों को सुझाव दिया कि होलिका पूजन में जल, रोली, अक्षत, पुष्प, गुलाल, और कच्चे सूत का प्रयोग करें। होलिका की परिक्रमा हमारे संकल्पों की शुद्धि का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि होलिका की अग्नि हमारे भीतर के अहंकार और ईर्ष्या रूपी असुरों को भस्म करने का माध्यम है। इसकी भस्म का तिलक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।





