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गैंगस्टर विकास दुबे ने सात दिन में किया 1250 किलोमीटर का सफर

  • लखनऊ नंबर की गाड़ी से महाकाल मंदिर पहुंचा दुर्दांत

लखनऊ। यूपी के आठ पुलिसवालों की हत्या के बाद छह दिन से फरार गैंगस्टर विकास दुबे की गुरुवार सुबह उज्जैन से गिरफ्तारी हुई। इसे पुलिस की कार्रवाई कम और विकास दुबे का सोचा-समझा सरेंडर ज्यादा माना जा रहा है। वजह यह कि जितने आराम से उसकी महाकाल मंदिर से गिरफ्तार हुई, वह कई सवाल खड़े कर रही है। छह दिन तक वह चार राज्यों में घूमता रहा। इनमें से तीन राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है।

विकास दुबे ने इस दौरान 1250 किलोमीटर का सफर बाइक, ट्रक, कार और आटो से तय किया। यूपी पुलिस के 100 जवान उसकी तलाश में थे, लेकिन वह गिरफ्त से दूर रहा। उसे आखिरकार महाकाल मंदिर के गार्ड ने पहचाना और निहत्थे सिपाहियों ने पकड़ लिया। महत्वपूर्ण बात ये है कि महाकाल मंदिर परिसर में 170 आधुनिक कैमरे लगे हुए हैं। इसके अलावा यहां हर समय 60 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। गुरुवार सुबह जब मंदिर से विकास को गिरफ्तार किया गया, तब भी वहां भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे।

विकास दुबे मुंह पर मास्क लगाकर खुलेआम घूम रहा था

हैरानी की बात यह है कि इस सब के बावजूद विकास दुबे मुंह पर मास्क लगाकर खुलेआम घूम रहा था। उसने मंदिर में फोटो भी खिंचवाए और किसी को खबर तक नहीं लगी। कुख्यात विकास दुबे को पकड़ने के लिए उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, और मध्यप्रदेश में अलर्ट जारी किया गया था लेकिन विकास इतना शातिर है कि सात दिनों तक सात राज्यों की पुलिस को गुमराह करता रहा।

विकास को पकड़ने के लिए कानपुर के चालीस थानों के पुलिसबल, सैकड़ों पुलिसकर्मी और यूपी एसटीएफ की कुल मिलाकर सौ से अधिक टीमें, साथ ही प्रदेश का खुफिया विभाग उसकी तलाश करता रहा लेकिन इन सब को गच्चा देकर वो मध्यप्रदेश भाग निकला और फिर बड़ी आसानी से पुलिस की गिरफ्त में आ गया। लखनऊ नंबर की गाड़ी से महाकाल जी मंदिर पहुंचा था विकास दुबे। नंबर प्लेट पर हाईकोर्ट लिखा हुआ है। यह गाड़ी मनोज यादव के नाम पर रजिस्टर्ड है। उसके साथ लखनऊ के दो वकील भी थे।

पुलिस ने दोनों वकीलों को हिरासत में लेकर पूछताछ की

पुलिस ने दोनों वकीलों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि वह किस रूट से उज्जैन पहुंंचा। पुलिस के मुताबिक सात जुलाई की रात को विकास का फरीदाबाद में पहला सीसीटीवी फुटेज सामने आया था। जहां वो होटल में कमरा लेने गया था। इस दौरान विकास ने अपनी भाभी के यहां शरण ली। फरीदाबाद से गायब होने के बाद विकास 750 किमी दूर मध्यप्रदेश के उज्जैन में नजर आया। यहां उसने महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए पर्ची कटवाई फिर मंदिर प्रांगण में घूमता रहा।

दूसरी तरफ कानपुर गोलीकांड के पांच दिन तक विकास कहां है किसी को पता नहीं था। विकास की आखिरी लोकेशन पुलिस ने औरैया में ट्रेस की थी। इसके बाद विकास का मोबाइल आॅफ हो गया। इस दौरान विकास के उन्नाव, कानपुर देहात, मेरठ, दिल्ली फिल्म सिटी, नेपाल बॉर्डर सहित कई जगहों पर मिलने की आशंका में पुलिस दबिश देती रही।

आखिर उज्जैन कैसे पहुंचा विकास दुबे?

अब बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि आखिर उज्जैन कैसे पहुंचा विकास दुबे? बुधवार को फरीदाबाद और एनसीआर में लोकेशन मिलने के बाद आखिर वह उज्जैन कैसे पहुंचा यह बड़ा सवाल है। हालांकि अब उज्जैन पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। यूपी पुलिस ने वहां पहुंचकरक उससे गहन पूछताछ की। कानपुर पुलिस का कहना है कि विकास दुबे का राजनीतिक इतिहास भी चौंकाने वाला है। यह जिस पार्टी की सरकार रहती है उसी पार्टी के दमदार नेताओं के संपर्क में रहकर अपनी सुरक्षा करता है। सबसे ज्यादा राजनीतिक पकड़ इसको बसपा की सरकार में मिली।

तब से लेकर यह सपा के कई प्रमुख नेताओं और भाजपा के भी कुछ नेताओं के संपर्क में रह रहा था, लेकिन भाजपा के एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की वजह से भारतीय जनता पार्टी में उसकी घुसपैठ पिछले 2 साल से नहीं हो पा रही थी। दूसरी तरफ ये भी आशंका है कि विकास दुबे कोरोना पॉजिटिव हो सकता है। क्योंकि उसके रिश्तेदार श्रवण मिश्रा की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। इसके चलते आशंका व्यक्त की जा रही है कि वह भी कोराना पॉजीटिव हो सकता है। लिहाजा उसका कोरोना टेस्ट कराया जाएगा।

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