हैदराबाद। प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के शीर्ष कमांडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवूजी ने दावा किया है कि 24 फरवरी को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने से पहले ही पुलिस ने उसे तथा अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया था।उसने कानूनी ढांचे के भीतर रहकर लोगों की समस्याओं के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।करीब चार दशकों से भूमिगत जीवन व्यतीत करने वाले देवूजी ने यह भी कहा कि उसने और अन्य सदस्यों ने मौत के डर से पुलिस के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि जनता के लिए काम करने तथा अपनी विचारधारा – मार्क्सवाद, लेनिनवाद और माओवाद – को कानूनी ढांचे के भीतर आगे बढ़ाने के मकसद से यह कदम उठाया।देवूजी ने शुक्रवार को कहा कि उसे मौत का कभी डर नहीं था और अगर ऐसा होता तो वह पिछले साल अक्टूबर में महाराष्ट्र सरकार के सामने प्रमुख माओवादी नेताओं मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू और अशन्ना उर्फ सतीश की तरह आत्मसमर्पण कर देता।
पुलिस सूत्रों ने पहले बताया था कि देवूजी की माओवादी मार्ग छोड़ने की कोई योजना नहीं थी। देवूजी ने टीवी चैनलों से कहा,जब आॅपरेशन कगार तेज था तो हमने पार्टी को मजबूत करने के लिए अपरिहार्य परिस्थितियों में अलग-अलग जगहों पर शरण ली। उन परिस्थितियों में तेलंगाना पुलिस ने हमें गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अगर वे चाहते तो हमें मार सकते थे। लेकिन उन्होंने हमसे कहा कि हत्या करना उनकी नीति नहीं है और वे आत्मसमर्पण करवाना चाहते थे लेकिन मैं आत्मसमर्पण करने को तैयार नहीं था।
पूर्व माओवादी नेता ने उसके पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने संबंधी धारणा को खारिज करते हुए कहा कि पहले वह भूमिगत रहकर लोगों की समस्याओं का समाधान करता था और अब वह यही काम खुले तौर पर कानूनी तरीकों का इस्तेमाल करते हुए करेगा। देवूजी ने कहा कि वह मार्क्सवाद, लेनिनवाद और माओवाद की विचारधारा को नहीं छोड़ेगा तथा भविष्य में लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए यही उसकी रणनीति का केंद्र बिंदु रहेगा। उसने कहा, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि हमने आत्मसमर्पण कर दिया या मुख्यधारा में शामिल हो गए। हम हमेशा हजारों लोगों के संपर्क में रहते हैं। देवूजी ने चार दशकों से अधिक समय तक भूमिगत जीवन बिताने के बाद 24 फरवरी को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।





