सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस
लखनऊ। मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर के पावन प्रांगण में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस का आयोजन अत्यंत भक्तिमय एवं भावविभोर वातावरण में संपन्न हुआ। बाल व्यास परम पूज्य श्री राघवाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित अमृतवाणी ने समस्त श्रद्धालुओं के हृदय को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।
इस दिवस की कथा में भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं के साथ-साथ उनके अनन्य भक्तों—प्रह्लाद, द्रौपदी, सुदामा, गोपियों आदि की अद्वितीय भक्ति, अटूट श्रद्धा एवं पूर्ण समर्पण का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथाओं के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि सच्ची भक्ति के आगे भगवान स्वयं अपने भक्तों के रक्षक बन जाते हैं।
भक्त प्रह्लाद की अडिग आस्था, द्रौपदी की पुकार पर भगवान का चीरहरण से संरक्षण, सुदामा की निष्काम मित्रता तथा गोपियों की अनन्य प्रेम-भक्ति का वर्णन सुनकर श्रोतागण भाव-विभोर हो उठे। पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखें कई बार भावुकता से नम हो गईं और वातावरण जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंज उठा।
कथा श्रवण के उपरांत सभी भक्तों ने स्वयं को अत्यंत धन्य और कृतार्थ अनुभव किया तथा माँ श्री बड़ी काली जी एवं भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। इस पावन आयोजन के निवेदक देवराज सिंह ने अधिकाधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति पर हर्ष व्यक्त करते हुए सभी भक्तों, आयोजकों एवं सेवाभावी कार्यकतार्ओं का आभार प्रकट किया।
मीडिया प्रभारी अभय उपाध्याय ने बताया की कथा के दौरान मंदिर व्यवस्था में मुख्य रूप से प्रबंधक देवराज सिंह मातृशक्ति सेविका आशा तिवारी माला गुप्ता शालनी लक्ष्मी पंडित शिवम पांडेय राहुल सारस्वत तुषार वर्मा निखिल मेघांश आदर्श महाराज पप्पू एवं अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।





