चीन की लापरवाही और चालाकी के कारण कोरोना वायरस अब तक दो दर्जन से अधिक देशों में पहुंच गया है और जिस गति से यह फैल रहा है उससे पूरी दुनिया पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक रूप से भारत में इसके वायरस की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से चीन में करीब एक महीने तक इस मामले को दबाये रखा गया उसके कारण बड़ी संख्या में कोरोना वायरस से पीड़ित लोग बाहर चले गये और जहां-जहां गये वहां कोरोना वायरस पहुंच गया।
जब मामले की गंभीरता का खुलासा हुआ और पूरी दुनिया में हड़कंप मचा तब जाकर चीन से आने वाली उड़ानों और बंदरगाहों की निगरानी शुरू हुई। यही कारण है कि निगरानी के बावजूद वायरस पीड़ितों के साथ पहले ही कई देशों में पहुंच गया है। हालांकि अभी भारत में किसी भारतीय के इससे पीड़ित होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन चीन से आने वाले लोगों की जांच पड़ताल में कई लोग ऐसी बीमारी से पीड़ित पाये गये हैं जो कोरोना के संदिग्ध शिकार हो सकते हैं।
चीन में महामारी का रूप ले चुकी इस बीमारी से दो से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, डेढ़ हजार के करीब गंभीर हैं और दस हजार से अधिक लोगों में इसकी पुष्टि हो चुकी है। वुहान चीन का एक तरह से ट्रॉसपोर्ट सिटी है जहां पूरी दुनिया के लोग रहते हैं और इस महामारी का सबसे अधिक प्रकोप वुहान में ही है। इसलिए जब वुहान से भारतीयों को निकाला जायेगा तो उनसे भी संक्रमण फैलने का खतरा बना रहेगा। बहरहाल चीन और नेपाल के रास्ते भारत में आने वाले लोगों की निगरानी शुरू कर दी गयी है।
चीन से आने वाले यात्रियों की हवाई अड्डे पर जांच की जा रही है जबकि नेपाल के रास्ते भारत आने वाले लोगों की भी निगरानी की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर पर केबिनेट सचिव एवं स्वास्थ्य सचिव कोरोना से निबटने की तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं। अधिकांश राज्यों में आइसोलेशन वार्ड बनाये गये हैं। सरकारी स्तर पर इलाज और जांच के व्यापक इंतजाम के साथ ही लोगों को जागरूक करने की भी जरूरत है। दरअसल यह वायरस ठंड के मौसम और सघन आबादी में बहुत तेजी से फैलता है। भारत में सर्दी का मौसम है और आबादी भी सघन है, ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है।
उत्तर भारत में जहां अत्यधिक सघन आबादी है, लोग खांसने, छींकने और हाथ धोने में बहुत अधिक लापरवाह हैं। लोग खांसने, छींकने से पहले मुंह पर रूमाल नहीं रखते, किसी के मुंह पर कोई भी खांसकर निकल जाता है। यह स्थितियां कोरोना के लिए बहुत उपयुक्त हैं। इसलिए सरकार को, टीवी चैनलों को, सोशल मीडिया के माध्यम से और प्रचार-विज्ञापन के माध्यम से कोरोना से बचाव के लिए जनजागरुकता अभियान छेड़ने की जरूरत है।
लोगों को कोरोना के लक्षणों से परिचित कराने के साथ ही खांसने, छींकते समय सुरक्षात्मक उपाय करने, ठीक से हाथ धोने और जंगली एवं पालतू जानवरों से दूर रहने के लिए जागरुक करना चाहिए। कोरोना जिस तरह फैलता है अगर उसमें कोई भी लापरवाही की जाती है, तो इसका वायरस महामारी बन सकता है।





