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विनायक चतुर्थी कल, भक्त करेंगे श्रीगणेश की पूजा

और मनुष्य को ज्ञान, बुद्धि व सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है
लखनऊ। हिंदू धर्म में प्रत्येक मास की चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश की आराधना के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है, किंतु मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी का महत्व इससे भी अधिक है। यह मास देवताओं का प्रिय माना गया है, इसलिए इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के समस्त विघ्न दूर होते हैं और मनुष्य को ज्ञान, बुद्धि व सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस बार यह चतुर्थी 24 नवंबर को मनाई जाएगी।

विनायक चतुर्थी का धार्मिक महत्व
गणेश पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मार्गशीर्ष मास की विनायक चतुर्थी को विशेष सिद्धिप्रद बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रीगणेश की पूजा करने वालों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं। नए कार्यों की शुरूआत, शिक्षा, करियर, व्यवसाय और पारिवारिक जीवन में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए यह तिथि अत्यंत कल्याणकारी मानी जाती है। इस दिन की गई पूजा का प्रभाव कई गुना बढ़कर मिलता है।

विनायक चतुर्थी पूजा विधि
पूजन के लिए घर के मंदिर या किसी शुभ स्थान पर लकड़ी के पाटे पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर श्रीगणेश की प्रतिमा अथवा स्वच्छ तस्वीर स्थापित की जाती है। इसके बाद पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर बैठकर व्रत का संकल्प लिया जाता है। संकल्प लेते समय भगवान गणेश से परिवार की सुख-समृद्धि, ज्ञान-वृद्धि और विघ्नों के नाश की कामना की जाती है। इसके बाद भगवान गणेश पर गंगाजल छिड़ककर जलाभिषेक किया जाता है और चंदन, रोली, अक्षत, दूर्वा, लाल पुष्प तथा सुगंधित धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। चतुर्थी तिथि पर गणेश जी को दूर्वा, मोदक और गुड़-तिल के लड्डू अत्यंत प्रिय माने गए हैं, इसलिए इन्हें अवश्य चढ़ाना चाहिए। पूजन के दौरान गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश स्तुति, गणेश चालीसा या ह्यॐ गं गणपतये नम:ह्णमंत्र का 108 बार जप शुभ माना गया है। यह मंत्र जीवन से बाधाएं दूर करता है और मन को एकाग्र बनाने में सहायता करता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को दिनभर सात्त्विक आचरण का पालन करना चाहिए। फलाहार किया जा सकता है और एक समय भोजन का नियम भी रखा जा सकता है। शाम को पुन: दीप प्रज्वलित कर भगवान गणेश की आरती करनी चाहिए।

विनायक चतुर्थी पूजा का फल
विघ्नों का नाश: श्रीगणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है। इस दिन की पूजा से जीवन में आ रहे अवरोध दूर होते हैं और सभी कार्य सुगमता से सिद्ध होते हैं।

बुद्धि और निर्णय क्षमता में वृद्धि: विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह याददाश्त, एकाग्रता और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाता है।

  1. धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति: गणेश जी को ऋद्धिझ्रसिद्धि के दाता कहा गया है। इस दिन की पूजा से घर में लक्ष्मी प्रवेश करती है और आर्थिक स्थिरता बढ़ती है।

पारिवारिक शांति: यह व्रत परिवार में सद्भाव, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा लाता है। दांपत्य जीवन की समस्याएँ भी दूर होती हैं।

नए शुभ कार्यों की सफलता: जिन लोगों को नए व्यवसाय या कार्य में बाधाएँ आ रही हों, उन्हें इस तिथि पर विशेष पूजा करने से तुरंत सफलता मिलती है।

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