नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली जिलों की 888 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध नहीं है। प्रदेश के मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को यह जानकारी दी। हालांकि, राज्य के शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि हर जिले के पास मलजल के निपटान के लिए एक प्रस्तावित कार्य योजना है।
अधिकरण उत्तर प्रदेश में हिंडन नदी के प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है। अधिकरण ने इससे पहले इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा था।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 17 अगस्त के आदेश में कहा कि मुख्य सचिव ने अधिकरण के निर्देश के अनुपालन में इस साल 28 अप्रैल को एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया है, जिसमें मलजल के उत्पादन और उसके उपचार के बीच के अंतर तथा इसे दूर करने के लिए प्रस्तावित कदमों की जानकारी दी गई है।
हलफनामे में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, गाजियाबाद की 258, मेरठ की 362, बागपत की 180, सहारनपुर की छह और मुजफ्फरनगर व शामली की 82 अनधिकृत कॉलोनियों में सीवर नेटवर्क नहीं है। इन कॉलोनियों में करीब चार लाख लोग रहते हैं।





