मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने यस बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक को उबारने में बांडों और शेयरों में निवेश को बट्टे खाते डालने के केंद्रीय बैंक के निर्णय का शुक्रवार को बचाव किया। उन्होंने इसे जमाकर्ताओं के हित में उठाया गया वैध कदम बताया। दास ने कहा कि बैंकों को बचाने के मामले का कोई निश्चित तरीका नहीं हो सकता है।
हर मामले में उसके हिसाब से समाधान करना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इस साल मार्च में यस बैंक को डूबने से बचाने के दौरान 7,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त टियर-1 बांड को बट्टे खाते डाल दिया गया था। जबकि लक्ष्मी विलास बैंक के मामले में करीब 320 करोड़ रुपये के टियर-2 बांड और लगभग सभी बकाया शेयरों को बट्टे खाते डाल दिया गया। इनमें से कई कदम अभूतपूर्व हैं और इससे प्रभावित होने वाले पक्षों ने अदालत का रुख किया।
द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा के बाद एक वर्चुअल संवाददाता सम्मेलन में दास ने कहा, यह कार्वाई जमाकर्ताओं के हितों को देखते हुए की गई। इन्हें अपनाने के दौरान नियामकीय दिशानिर्देश और वैध प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया गया। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक वित्त बाजार या अर्थव्यवस्था के अन्य किसी भी क्षेत्र को लेकर तटस्थ रुख रखता है। और बैंकों को डूबने से बचाने के लिए जो निर्णय लिए गए वह जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा से जुड़े थे। यही रिजर्व बैंक की सर्वाेच्च जिम्मेदारी है।
दास ने इस संबंध में ज्यादा विस्तृत जानकारी देने से मना कर दिया और कहा, हमारी सभी कार्वाइयां कानून के दायरे में हैं। यह कानून सम्मत और नियामकीय दिशानिर्देशों के अनुरूप हैं। यस बैंक को डूबने से बचाने के लिए भारतीय स्टेट बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों में उसमें 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। वहीं लक्ष्मी विलास बैंक के मामले में रिजर्व बैंक ने उसका विलय डीबीएस बैंक में कर दिया।





