मुंबई। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को पूंजी संरक्षण बफर (सीसीबी) की अंतिम किस्त के लिए बैंकों को छह महीने की और मोहलत दी है। कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। सीसीबी पूंजी पर्याप्तता अनुपात की तरह है जो बैंकों के दिए गए इक्विटी पूंजी के एक प्रतिशत के रूप में रखना होता है ताकि ऋण फंसने या आर्थिक संकट की स्थिति में इसका उपयोग किया जा सके।
इस कदम से बैंकों के पास 35,000 करोड़ रुपए की पूंजी बचेगी औ वे अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों को कर्ज दे सकेंगे। नीतिगत उपायों की घोषणा करते हुए आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, कोरोना वायरस महामारी के कारण दबाव को देखते हुए सीसीबी की 0.625 प्रतिशत की अंतिम किस्त के क्रियान्वयन को 31 मार्च से 30 सितंबर 2020 तक टाले जाने का निर्णय किया गया है।
फिलहाल बैंक का सीसीबी उनकी इक्विटी पूंजी (कोर कैपिटल) का 1.875 प्रतिशत है। गवर्नर ने कहा कि सीसीबी को इस रूप से तैयार किया गया है बैंक सामान्य समय में एक पूंजी बनाए और जब भी घाटे की स्थिति या दबाव का मामला बने, इसका उपयोग किया जा सके।
बासेल मानकों के अनुसार सीसीबी को 0.625 की किस्तों में 2.5 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके तहत 31 मार्च तक इसे 2.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य था। यह व्यवस्था 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट के बाद लाई गई। इसका मकसद बैंकों को प्रतिकूल आर्थिक स्थिति से मुकाबला करने में सक्षम बनाना है।





