वरिष्ठ संवाददाता लखनऊ। केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग में स्ट्रेचर को लेकर तीमारदार व कर्मचारी आपस में भिड़ गये। दरअसल यहां जमानत राशि जमा करने के बाद ही स्ट्रेचर दिया जाता है। कर्मचारियों ने जब एक तीमारदार से धनराशि जमा करने को कहा तो उसने इंकार कर दिया। इस पर कर्मचारी ने स्ट्रेचर नहीं दिया। इससे दोनों में जमकर कहासुनी हुई। हगांमा इतना बढ़ गया कि पुलिस को बुलाना पड़ा। पुलिस ने किसी तरह मामले को शान्त कराया।
गोंडा निवासी सतीश को यूरोलॉजी संबंधी समस्या है। परिवारीजन उन्हें लेकर ओपीडी पहुंचे। यहां से उन्हें कुछ जांच के लिए विभाग भेजा गया। जांच के बाद परिवारीजन मरीज को घर ले जाने लगे। तभी उन्हें स्ट्रेचर की जरूरत लगी। परिवारीजन मुख्य द्वार पर पहुंचे। स्ट्रेचर देने के लिए कर्मचारी से कहा। कर्मचारी ने जमानत राशि या फिर आधार कार्ड जमा करने के लिए कहा। ताकि मरीज को गाड़ी तक पहुंचाने के बाद स्ट्रेचर दोबारा विभाग में जमा कराया जा सके। इस बात पर तीमारदारों ने विभाग में हंगामा शुरू कर दिया। तीमारदारों ने पुलिस को सूचना दी।
परिसर स्थित पुलिस चौकी के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने तीमारदारों से नियमों की जानकारी दी। यह भी बताया कि यह व्यवस्था का हिस्सा है। स्ट्रेचर वापस देने पर जमानत राशि या आधार कार्ड वापस दे दिया जाता है। काफी जद्दोजहद के बाद मामला शांत हुआ। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह का कहना है कि कई बार स्ट्रेचर व व्हील चेयर का इस्तेमाल करने के बाद तीमारदार रास्ते में छोड़ देते हैं। इससे दूसरे मरीजों को असुविधा होती है। इसलिए आधार कार्ड या जमानत राशि जमा कराई जाती है, ताकि वापस उसी स्थान पर रखें जहां से ले गए थे। यह व्यवस्था मरीजों की सुविधा के लिए ही शुरू की गयी है ताकि सभी को समय पर स्ट्रेचर आसानी से मिल सके।





