लखनऊ। हर साल मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि पर अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस शुभ अवसर पर देवी मां अन्नपूर्णा और देवों के देव महादेव की विशेष पूजा की जाती है। व्रती देवी मां अन्नपूर्णा की कृपा पाने के लिए भोजन पकाकर पूजा के समय देवी मां अन्नपूर्णा को भेंट करती हैं। इस समय तक गृहिणी व्रत रखती हैं। पूजा समापन के बाद प्रसाद रूप में भोजन ग्रहण करती हैं।धार्मिक मत है कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि पर देवी मां अन्नपूर्णा की पूजा करने से अन्न और धन के भंडार भरे रहते हैं। इसके साथ ही देवी मां पार्वती की कृपा से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि 4 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर होगी और 5 दिसंबर को सुबह 04 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार 04 दिसंबर को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाएगी।
ज्योतिषियों की मानें तो अन्नपूर्णा जयंती पर दुर्लभ शिव और सिद्ध योग का संयोग बन रहा है। शिव योग का संयोग दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक है। इसके बाद सिद्ध योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही दोपहर दोपहर 02 बजकर 54 मिनट तक रवि योग है। इसके अलावा, भद्रावास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में मां अन्नपूर्णा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। अन्नपूर्णा जयंती पर कृत्तिका और रोहिणी नक्षत्र का संयोग है। इसके साथ ही वणिज करण के शुभ योग बन रहे हैं। इन योग में भगवान शिव और मां अन्नपूर्णा की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। सनातन शास्त्रों में वर्णित है कि चिर काल में एक बार पृथ्वी लोक पर अन्न का अकाल पड़ गया। इससे पृथ्वी लोक पर हाहाकार मच गया। यह जान भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी समेत देवी-देवता जगत की देवी मां पार्वती और भगवान शिव के पास पहुचें। उनसे अन्न की समस्या को दूर करने की याचना की। देवताओं की समस्या जान भगवान शिव और मां पार्वती पृथ्वी लोक पर आये। पृथ्वी लोक पर अन्न की कमी से त्राहिमाम मचा हुआ था। तब देवी मां पार्वती ने अन्नपूर्णा स्वरूप धारण कर भगवान शिव को दान में अन्न प्रदान किया। तब भगवान शिव ने अन्न को पृथ्वीवासियों के मध्य वितरित किया। इस प्रकार पृथ्वी लोक से अन्न की कमी दूर हो गई। तब से देवी मां अन्नपूर्णा की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। कहते हैं कि देवी मां अन्नपूर्णा का वास किचन में होता है। इसके लिए किचन की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।
अन्नपूर्णा जयंती पर लगेगी भद्रा
4 दिसंबर को अन्नपूर्णा जयंती पर भद्रा काल भी रहेगा। इस दिन भद्रा काल सुबह 08:37 बजे से शुरू होकर शाम को 06:40 बजे तक रहेगा। भद्रा का वास स्वर्ग में है ऐसे में शुभ कार्य इस समय किए जा सकेंगे. भद्रा का बुरा प्रभाव नहीं पड़ेगा। राहुकाल दोपहर के समय 01:29 बजे से लेकर 02:48 बजे तक होगा।
अन्नपूर्णा जयंती का महत्व
अन्नपूर्णा जयंती के अवसर पर व्रत रखकर माता अन्नपूर्णा की पूजा करते हैं। देवी अन्नपूर्णा का मंदिर काशी विश्वनाथ मंदिर के पास ही है। इस दिन पूजा के बाद अन्न का दान करना चाहिए। अन्न दान करने से घर धन और धान्य से भरा रहता है। देवी अन्नपूर्णा की कृपा से व्यक्ति को अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
अन्नपूर्णा जयंती की पूजा विधि
अन्नपूर्णा जयंती पर सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। पूजाघर को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर घर को शुद्ध करें। इस दिन घर के चूल्हे को अच्छे से साफ कर पूजा करें। चूल्हे पर चावल, हल्दी, कुमकुम, धूप के साथ ही फूल चढ़ाएं। पूजा घर में भगवान शिव और माता पार्वती की एक साथ बेदी बनाएं और पूजा करें। अक्षत फूल और भोजन का भोग चढ़ाएं। पूजा के समय मां पार्वती से मन ही मन प्रार्थना करें कि घर का भंडार भरा रहे। पूजा को माता अन्नपूर्णा की आरती के साथ संपन्न करें, श्रद्धा अनुसार गरीब को अन्न और गर्म कपड़े का दान करें।





