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योगी कैबिनेट के 21 बड़े फैसले…जेवर एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेस-वे तक बनेगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे

  • मदरसों में कामिल-फाजिल डिग्री की मान्यता होगी खत्म, एक्सप्रेस-वे, किसान बीमा, घुमंतू विकास बोर्ड समेत कई प्रस्तावों को मंजूरी


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, बुनियादी ढांचे, जनकल्याण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 21 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों में एक्सप्रेस-वे निर्माण, क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण, किसान कल्याण, श्रमिक हित और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई अहम निर्णय शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। संशोधन लागू होने के बाद प्रदेश के मदरसों में दी जाने वाली कामिल और फाजिल डिग्रियों की मान्यता समाप्त हो जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने अहम 21 प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की

प्रदेश में बेहतर कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास को गति देने के लिए जेवर एयरपोर्ट से गंगा एक्सप्रेस-वे तक (बुलंदशहर के रास्ते) 74.467 किलोमीटर लंबे 6-लेन प्रवेश नियंत्रित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण को मंजूरी दी गई है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे 8-लेन तक विस्तार योग्य बनाया जाएगा। इसके अलावा प्रयागराज और चित्रकूट क्षेत्र के समन्वित विकास के लिए प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन को स्वीकृति दी गई है। वहीं प्रदेश के सात प्रमुख स्थानों पर लोक निर्माण विभाग की ओर से अधिग्रहीत भूमि को बहुउद्देशीय हब विकसित करने के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को नि:शुल्क हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया है।

तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ और नोएडा में अत्याधुनिक यू-हब स्थापित किए जाएंगे। सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन और उच्च शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से लिया है। सरकार का कहना है कि कामिल और फाजिल डिग्रियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त नहीं है, इसलिए इन्हें उच्च शिक्षा की मान्य डिग्री व्यवस्था से अलग किया जा रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद आगे की वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर नई व्यवस्था लागू की जाएगी। सरकार के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य उच्च शिक्षा प्रणाली में एकरूपता, पारदर्शिता और राष्ट्रीय नियामकीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना है। कैबिनेट बैठक में मदरसा शिक्षा अधिनियम में संशोधन के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम में संशोधन के बाद प्रदेश में मदरसों से जुड़ी डिग्री व्यवस्था में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निदेर्शों के अनुपालन में उठाया गया है। सामाजिक समरसता और समावेशी विकास के उद्देश्य से राज्य के विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड के गठन को मंजूरी दी गई है। वहीं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 के प्रभावी संचालन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांतों में संशोधन और नए बजट प्रावधान को स्वीकृति दी गई है। ग्राम्य विकास विभाग की सामुदायिक परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और एचसीएल फाउंडेशन के बीच वर्ष 2015 से चल रहे समझौते को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की मार से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 (खरीफ 2026 और रबी 2026-27) में पूरे प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। योजना के तहत किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम रखा गया है। खरीफ फसलों के लिए किसानों को बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत और रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। जबकि वार्षिक वाणिज्यिक एवं औद्यानिक फसलों के लिए किसान का अंश अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। वास्तविक प्रीमियम दर और किसानों के हिस्से के बीच की राशि का पूरा अंतर केंद्र और राज्य सरकार बराबर-बराबर वहन करेंगी।

सरकार ने फसल बीमा कराने की समय सीमा भी तय कर दी है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ मौसम के लिए 31 जुलाई और रबी मौसम के लिए 31 दिसंबर तक किसान बीमा करा सकेंगे। हालांकि विभाग के अनुसार खरीफ फसलों के बीमा की अंतिम तिथि आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत किसान जोखिम शुरू होने से एक दिन पहले तक अपनी फसलों का बीमा करा सकेंगे। कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुपालन में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 में प्रथम संशोधन को मंजूरी दी है। इसके साथ ही श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 के प्रख्यापन को स्वीकृति दी गई।

भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2020 को केंद्र सरकार से वापस लेने पर भी सहमति बनी। राज्य संपत्ति विभाग लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली और भूतत्त्व एवं खनिकर्म (समूह क एवं ख) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदान और संबंधित विनियोग विधेयक को मंजूरी प्रदान की। इसके अलावा भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की वर्ष 2026 की राज्य वित्त, मनरेगा, जल जीवन मिशन, सिविल और राजस्व आॅडिट रिपोर्टों को विधानसभा में प्रस्तुत करने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण नीति-2017 के तहत मेसर्स आइक्यो सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को व्यावसायिक परिचालन तिथि में छूट देने और उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक-2026 को विधानमंडल में पेश करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। इनके अलावा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मार्गदर्शी सिद्धांतों में संशोधन, ग्राम्य विकास विभाग की समुदाय परियोजना के लिए वर्ष 2015 में हुए समझौते को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। कैबिनेट के इन फैसलों से प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार, निवेश को बढ़ावा देने और किसानों व कमजोर वर्गों के कल्याण को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

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