तुलसी साहित्य में जीवन-मूल्यों का सहज समन्वय
लखनऊ। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पखवाड़ा के अंतर्गत लोक संस्कृति शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश की 89वीं लोक चौपाल रविवार को इन्दिरा नगर स्थित ईश्वरधाम मंदिर परिसर में हुई। परिचर्चा एवं तुलसी पदों की सांगीतिक प्रस्तुति से सजी इस चौपाल की अध्यक्षता चौपाल चौधरी कोकिल कंठी पद्मा गिडवानी एवं कुमाऊं कोकिला विमल पन्त ने की। विषय प्रवर्तन करते हुए चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने रामभक्ति को लोकजीवन से जोड़ते हुए अपनी रचनाओं के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाया। उनके साहित्य में लोकभाषा, लोकसंस्कृति, मानवीय संवेदना और जीवन मूल्यों का सहज समन्वय दिखाई देता है।
संस्थान की सचिव डॉ. सुधा द्विवेदी ने कहा कि तुलसी का साहित्य आज भी हमारी सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करने के साथ समाज को जीवन-मूल्यों की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर वरिष्ठ गायिका आशा श्रीवास्तव के निर्देशन में तुलसी पदों की भावपूर्ण सांगीतिक प्रस्तुतियां हुईं। प्रीति श्रीवास्तव ने उमड़ घुमड़ के आये बदरा, अनुज श्रीवास्तव ने झूला धीरे से झुलाओ, ज्योति सिंह ने शंकर तेरी जटा में, गोपाली चन्द्रा ने ऐसो को उदार जग माहीं, रूपाली श्रीवास्तव ने कहां से उमही रे कारी बदरिया, अर्चना चौकसे ने प्रतिबंधित देशभक्ति गीत छीन सकती है नहीं सरकार वन्दे मातरम प्रस्तुत किया। सरिता अग्रवाल ने तुलसी के दोहों का पाठ किया। निवेदिता भट्टाचार्य के निर्देशन में प्रवीन गौर, लिली सक्सेना, सौम्या गोयल, अवांश, अव्युक्ता, अविका, मिहिका, अद्रिका, आश्वी एवं कर्णिका ने जागिए रघुनाथ कुँवर तथा हनुमानाष्कक की सुंदर प्रस्तुति दी।
अन्य सामूहिक प्रस्तुतियों में चंदना द्विवेदी, सुमन शर्मा, वरदा जोशी, सुनीता पाण्डेय, अपर्णा सिंह, मंजूषा श्रीवास्तव, दीपा शर्मा, मधु माथुर, सिंधुजा मित्तल, ज्योति किरन रतन, ज्योति पाण्डेय, सुषमा प्रकाश, सुमन मिश्रा, कविता सिंह, शिखा श्रीवास्तव आदि सम्मिलित रहे। कार्यक्रम में संस्थान की संरक्षक शारदा पाण्डेय, रंजना शंकर, वरिष्ठ समाजसेविका डॉ. स्मिता मिश्रा, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. करुणा पाण्डे, डॉ. आभा दीक्षित, राजनारायण वर्मा, नीलम वर्मा, देवेश्वरी पंवार, डॉ. राजकुमार शुक्ल, नीरा मिश्रा, संगीता श्रीवास्तव सहित अन्य की प्रमुख उपस्थिति रही।





