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तुम्हें दिल लगी भूल जानी पड़ेगी…

वरिष्ठ नागररिकों को मायण-सम्मान से अलंकृत किया गया

लखनऊ। मायण-महोत्सव हमारे जीवन में हमारी माँ की भूमिका की स्तुति करने के उद्देश्य से लखनऊ के इटौंजा क्षेत्र के एक गाँव गदेला में हर साल आयोजित होने वाला एक वार्षिक उत्सव है, जो शहर और गाँव दोनों संस्कृतियों को एक ही मंच पर मिलाने का एक ठोस प्रयास है। यह पांचवा सफल संस्करण था। इस वर्ष का कार्यक्रम ग्रामीण अंचल के वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान में समर्पित रहा है। बता दें कि राजस्थान की बोली में ‘मायण’ का मतलब ‘मां’ होता है। माँ नि:स्वार्थ प्रेम, त्याग, प्रेरणा और क्षमा का प्रतीक होती है। वास्तव में वह इस धरा पर ‘भगवान’ का निकटतम प्रतिबिंब यदि कोई है तो वह माता के अतिरिक्त कोई और नहीं हो सकता। इस वर्ष ग्रामीण अंचल के 07 कर्मयोगी महानुभावों क्रमश: कलीम-उल्लाह, संतोष सिंह, जगदेव यादव, रामगो, शिव दुलारी चौरसिया, अरुणा कुमारी व मधुरानी को मायण-सम्मान से अलंकृत किया गया। वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान में लखनऊ की प्रसिद्ध गायिका डॉ० प्रभा श्रीवास्तव ने गीता दत्त के नगमों की प्रस्तुति कर पुराने दिनों की ही याद तजा नहीं की अपितु जय-जवान जय किसान के उस युग की भी याद दिला दी जब ये गीत किसानों, फौजियों एवं वरिष्ठ नागरिकों की फरमाइश पर रेडियो पर सुने जाते थे और सभी उन गीत मालाओं या फरमाइशी गीतों का इंतजार करते थे। उन्होंने जाने कहां मेरा जिगर गया जी, ना जाओ सइयां छुड़ा के बड़यां, बाबूजी धीरे चलना, तदबीर से बिगड़ी हुई तकदीर बना ले आदि गाने गाकर माहौल को भावभीना कर दिया। इसी के साथ नव कलाकार मास्टर अमान आजम ने अपनी सूफी गायकी से रूह को सराबोर कर दिया। विभिन्न रागों में उन्होंने पसंदीदा फिल्मी नग्में व सूफी कलाम प्रस्तुत किये। जिनमें प्रमुख हैं तेरी दीवानी….. तुम्हें दिल लगी भूल जानी पड़ेगी… मेरे रश्के कमर…. और सइयां, तू जो छू ले प्यार से…। मीडिया जगत के प्रसिद्ध कलाकार लखनऊ के आफताब आलम द्वारा कार्यक्रम का संचालन किया गया और खुशनुमा प्रस्तुतियां भी की गयीं।
इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण लोगों के अलावा शहर के कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए। इसमें मुख्य अतिथि डॉ० रवि भट्ट के अतिरिक्त कीर्ति नारायण, गोपाल सिन्हा, श्रीमती विनीता मिश्रा, फकरे आजम, नवीन जोशी, कर्नल नीरज श्रीवास्तव, अनुराग डिडवानिया, अरुण अग्रवाल, बी.पी. माहेश्वरी, श्रीमती रेणुका टंडन, पद्मश्री कलीम-उल्लाह, अरविन्द मिश्रा, श्रीमती रश्मि मिश्रा, सुधीर मिश्रा, राजीव प्रधान, डी. प्रकाश (ए.डी.जी.), कृत राठोर (डी.आई.जी.), आर.जे. पारुल, रवि प्रकाश, श्रीमती शैल्वी शारदा, संगीता व अजेश जयशवाल आदि शामिल थे। मुख्य अतिथि डा० रवि भट्ट ने अपने संबोधन में ऐसे प्रयासों की सराहना करते हुए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच अधिक सार्थक संगम की आवश्यकता के अलावा वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनाओं के लिए एक बड़ी सामाजिक चेतना की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को और अधिक आसान, गरिमा पूर्ण और सामाजिक रूप से आनंदमयी बनाना था। सह-संयोजिका श्रीमती वंदना अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। महोत्सव ने दो विविध संस्कृतियों के आकर्षक मिश्रण से सभी अधितियों को ओजपूर्ण और मंत्रमुग्ध कर दिया। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह कार्यक्रम अपनी अनूठी सादगी के साथ-साथ अपने उद्देश्य की गंभीरता के लिए भी विशिष्ट रहा। ग्रामीण व्यंजनों और व्रत-आहार का भी मेहमानों ने भरपूर लुत्फ लिया।

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