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विश्व हिंदी दिवस आज : दुनिया में बढा हिंदी का कद : कथाकार अखिलेश

लखनऊ। विश्व हिंदी दिवस हिंदी भाषा को वैश्विक मंच पर मजबूत करने का प्रतीक है। हर साल 10 जनवरी को मनाया जाने वाला यह दिन हिंदी की अंतरराष्ट्रीय पहचान और बढ़ते प्रभाव को दशार्ता है। आज हिंदी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में बोली, पढ़ी और समझी जा रही है। यह दिवस लोगों को हिंदी के प्रति जागरूक करता है और इसके उपयोग को बढ़ावा देता है। विश्व हिंदी दिवस की शुरूआत 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित पहला विश्व हिंदी सम्मेलन से प्रेरित है। अब तक 12 विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं।आज हिंदी दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है, जिसे 60 करोड़ से ज्यादा लोग बोलते हैं। हिंदी भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय एकता का मजबूत माध्यम है। डिजिटल युग में हिंदी सोशल मीडिया, वेबसाइट्स, मोबाइल ऐप्स और आॅनलाइन कंटेंट के जरिए तेजी से फैल रही है। हिंदी अब सिर्फ साहित्य या बातचीत तक सीमित नहीं रही। यह विज्ञान, तकनीक, शिक्षा, कूटनीति और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में भी अपनी मजबूत जगह बना रही है। हिंदी प्रमुख कामकाजी भाषाओं में शामिल है और दुनिया के 100 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती है। विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ इसे रोजगार, शोध और वैश्विक संवाद की भाषा के रूप में और सशक्त बनाना है।
एक समय था जब व्यक्ति दूसरे लोगों के सामने हिंदी बोलने में संकोच करता था लेकिन अब वह दौर जा चुका है। हिंदी दिवस के मौके पर वॉयस आॅफ लखनऊ से खास बातचीत में कथाकार अखिलेश ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि गूगल, अमेजॉन एवं फ्लिपकार्ट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियां बाजार में व्यवसाय करने के लिए हिंदी भाषा को प्राथमिकता दे रही हैं। इतना ही नहीं पूरे विश्व में हिंदी सिनेमा, हिंदी के सीरियल एवं रियलिटी शो देखे जा रहे हैं। आने वाले समय में हिंदी तीसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली भाषा बनेगी। उन्होंने बताया कि एक सर्वेक्षण में पता चला है कि विश्व की 4700 भाषाओं में से इस समय सिर्फ 1100 भाषाएं ही जिंदा हैं। उनमें से 322 भाषाएं भारतीय उपमहाद्वीप में बोली जाती हैं लेकिन हिंदी एकमात्र ऐसी भाषा है जोकि विश्व स्तर पर लगातार बढ़ती जा रही है।

व्हाट्सएप पर करोड़ों लोग हिंदी में कर रहे चैट:
कथाकार अखिलेश कहते हैं आज 68 करोड़ से ज्यादा लोग व्हाट्सएप पर हिंदी में चैट करते हैं। यूपी समेत अन्य दूसरे कई राज्यों में अपने खुद की भाषा के समाचारपत्र या न्यूज चैनल को देखने के अलावा हिंदी भाषा के समाचारपत्र एवं न्यूज चैनलों का बोलबाला है। आज यूपी में शायद ही कोई राष्ट्रीय हिंदी अखबार है जिसका हिंदी का संस्करण न हो।

विदेश में हिंदी पढ़ने का बढ़ रहा चलन:
आज हिंदी उन देशों में बहुत तेजी से बढ़ रही है, जहां पर भारतीयों की एक बहुत बड़ी संख्या वर्षों से अपना व्यवसाय कर रही है। वे भारतीय रीति.रिवाजों को वहां पर जिंदा रखे हैं। इनमें जापान, कनाडा, अमेरिका इंग्लैंड और मध्य यूरोपीय देशों के साथ रूस और कजाकिस्तान जैसे देश हैं।

करीब 1,000 साल पुराना इतिहास:
कथाकार अखिलेश ने बताया कि हिन्दी भाषा का इतिहास करीब 1,000 साल पुराना माना गया है। सामान्यत: प्राकृत की अन्तिम अपभ्रंश अवस्था से ही हिन्दी साहित्य की शुरूआत मानी जाती है। उस समय अपभ्रंश के कई रूप थे और उनमें सातवीं.आठवीं शताब्दी से ही पद्य रचना शुरू हो गई थी। हिन्दी भाषा व साहित्य के जानकार अपभ्रंश की अंतिम अवस्था अवहट्ट से हिन्दी का उद्भव स्वीकार करते हैं।

विश्व हिंदी दिवस से अलग है राष्ट्रीय हिंदी दिवस :
कथाकार अखिलेश कहते हैं कि हिदी दिवस साल में दो बार 10 जनवरी और 14 सितंबर को मनाया जाता है। 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है और 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस होता है, हालांकि, दोनों का उद्देश्य हिंदी का प्रचार प्रसार ही है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार ने 14 सितंबर को हिंदी दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा संसद में की। आधिकारिक तौर पर राष्ट्रीय हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था। वहीं, हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाने के पीछे की वजह ये है कि भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 10 जनवरी 2006 को विश्व हिंदी दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा की गई थी। इस दिन के इतिहास की बात करें, तो पहला विश्व हिंदी सम्मेलन नागपुर महाराष्ट्र में 10 जनवरी 1975 में आयोजित किया गया था।

राजभाषा है हिंदी:
कथाकार अखिलेश कहते हैं कि हिंदी राष्ट्रीय नहीं बल्कि राजभाषा है। 14 सितंबर 1949 को देवनागरी लिपि हिंदी को भारत की राजभाषा तौर पर स्वीकार किया गया था। वहीं, 26 जनवरी 1950 को संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई थी। अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में हिंदी बोलने वालों की संख्या करीब 75-80 करोड़ है। भारत में करीब 77 फीसदी लोग हिंदी लिखते, पढ़ते, बोलते और समझते हैं।

साल में दो बार क्यों मनाया जाता है हिंदी दिवस
भारत की पहचान उसकी विविधता और संस्कृति में बसती है। अलग-अलग भाषाओं, बोलियों और परंपराओं के बीच हिंदी वह धागा है, जो पूरे देश को एक सूत्र में बांधती है। हिंदी के महत्व और उसकी उपयोगिता को दशार्ने के लिए हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है, लेकिन बहुत से लोग यह जानकर चौंक जाते हैं कि हिंदी दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि दो अलग-अलग तारीखों पर मनाया जाता है। तो आखिर ऐसा क्यों है? 10 जनवरी और 14 सितंबर दोनों ही दिनों को हिंदी से जोड़कर क्यों खास बनाया गया? आइए इस रोचक तथ्य को विस्तार से समझते हैं।

विश्व हिंदी दिवस की शुरूआत
राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ हिंदी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल भी की गई। इसी दिशा में 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में चुना गया। यह तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 1975 में इसी दिन नागपुर में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। बाद में 2006 से हर साल इस दिन को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। आज न सिर्फ भारत में बल्कि दुनिया के कई देशों में हिंदी बोलने वालों की संख्या करोड़ों में है। ऐसे में, विश्व हिंदी दिवस का मकसद है हिंदी को एक वैश्विक आवाज बनाना और विदेशों में भी उसकी पहुंच को मजबूत करना।

हिंदी दिवस का महत्व
हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति, साहित्य और एकता की आत्मा है। यह वह कड़ी है जो भारत की विभिन्न परंपराओं और प्रांतों को जोड़ती है। हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान और गौरव का प्रतीक भी है। आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। चाहे 14 सितंबर हो या 10 जनवरी, दोनों ही दिन हमें यह याद दिलाते हैं कि हिंदी हमारी जड़ों से जुड़ी ताकत है। राष्ट्रीय स्तर पर यह हमारी राजभाषा का सम्मान है और वैश्विक मंच पर यह भारतीय पहचान की आवाज है।


1975 में नागपुर में हुआ था पहला विश्व हिंदी सम्मेलन
लखनऊ। राष्ट्रीय हिन्दी दिवस हर साल भारत में 14 सितंबर को मनाया जाता है। इसके अलावा 10 जनवरी को विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इन दोनों तारीखों के पीछे इतिहास है। राष्ट्रीय हिन्दी दिवस की बात करें तो इसी दिन साल 1949 में संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने का फैसला किया था। वहीं, विश्व हिन्दी दिवस हर साल 10 जनवरी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1975 में नागपुर में पहले विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया था, जिसमें 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। सम्मेलन का उद्देश्य दुनिया भर में हिंदी भाषा को बढ़ावा देना था। इसकी वर्षगांठ के उपलक्ष्य में इसे हर साल मनाया जाता है। विश्व हिंदी दिवस पहली बार 2006 में पूर्व प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा दुनिया भर में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया गया था। हिंदी को इसका नाम फारसी शब्द हिंद से मिला है, जिसका अर्थ है सिंधु नदी की भूमि। 11वीं शताब्दी की शुरूआत में तुर्की के आक्रमणकारियों ने क्षेत्र की भाषा को हिंदी यानी, सिंधु नदी की भूमि की भाषा नाम दिया। यह भारत की आधिकारिक भाषा है, वहीं, अंग्रेजी दूसरी आधिकारिक भाषा है। भारत के बाहर कुछ देशों में भी हिंदी बोली जाती है, जैसे मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद और टोबैगो और नेपाल में। हिन्दी अपने वर्तमान स्वरूप में विभिन्न अवस्थाओं के माध्यम से उभरी, जिसके दौरान इसे अन्य नामों से जाना जाता था। हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए भारत में सभी जगह इसके उपयोग की सलाह दी जाती है। खासतौर पर जहां ज्यादातर अंग्रेजी का उपयोग होता है। इसके लिए 14 सितंबर से लेकर 21 सितंबर तक राजभाषा सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान देश में कई तरह के साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है।

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